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80G डिडक्शन लेने वालों के लिए अलर्ट! ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये गलती

अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न में धारा 80G के तहत दान पर टैक्स छूट का दावा करते हैं, तो इस बार आपको पहले से ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. आकलन वर्ष 202627 के लिए जारी नए ITR फॉर्म में आयकर विभाग ने 80G से जुड़े दावों के लिए अतिरिक्त जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है. इसका मकसद दान के दावों का डिजिटल तरीके से सत्यापन करना और फर्जी क्लेम पर रोक लगाना है.

80G डिडक्शन लेने वालों के लिए अलर्ट! ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये गलती

क्या बदला है?

अब केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि आपने कितनी राशि दान की है. यदि आपने UPI, NEFT, RTGS, IMPS या चेक के जरिए दान किया है, तो ITR में उस भुगतान का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर और भुगतान करने वाले बैंक का IFSC कोड भी देना पड़ सकता है. यानी आयकर विभाग अब दान की राशि के साथ उसके भुगतान का पूरा रिकॉर्ड भी जांच सकेगा.

किन ITR फॉर्म में लागू होगा नियम?

यह नया खुलासा उन सभी ITR फॉर्म में जोड़ा गया है, जिनमें धारा 80G के तहत टैक्स कटौती का दावा किया जा सकता है. इनमें ITR1, ITR2, ITR3 और ITR4 शामिल हैं. अलगअलग फॉर्म में इसका प्रारूप थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन मांगी जाने वाली जानकारी लगभग समान रहेगी.

क्यों किया गया यह बदलाव?

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल वेरिफिकेशन का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है. बैंक, नियोक्ता और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले डेटा का मिलान ITR में दी गई जानकारी से किया जाता है. ऐसे में गलत या अधूरी जानकारी देने पर रिटर्न की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है या टैक्स छूट का दावा भी खारिज किया जा सकता है.

ITR भरने से पहले रखें ये दस्तावेज तैयार

80G के तहत टैक्स छूट लेने वाले करदाताओं को ITR दाखिल करने से पहले दान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट या भुगतान की पुष्टि, ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर और बैंक का IFSC कोड तैयार रखना चाहिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लें कि जिस संस्था को दान दिया गया है, वह धारा 80G के तहत मान्यता प्राप्त है.

इन गलतियों से बचें

विशेषज्ञों का कहना है कि गलत ट्रांजैक्शन नंबर भरना, दान की गलत राशि दर्ज करना, अपात्र संस्था के लिए छूट का दावा करना या भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित न रखना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है. अगर किसी जानकारी की पुष्टि नहीं है, तो अनुमान के आधार पर विवरण भरने से बचें.

आयकर विभाग के बढ़ते डिजिटल सत्यापन के दौर में अब सही दस्तावेज और सटीक जानकारी के साथ ITR दाखिल करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है. इससे रिटर्न जल्दी प्रोसेस होगा और नोटिस या अतिरिक्त पूछताछ की संभावना भी कम रहेगी.

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