
Bahubali Vijay Mishra Story: वे लोग जो समझते हैं कि वेब सीरीज मिर्जापुर के कालीन भैया, मुन्ना भैया और गुड्डू भैया का भौकाल ही सबसे बड़ा था, उन्हें पूर्वांचल की असली धरती का इतिहास जरूर जानना चाहिए. एक दौर था जब पूर्वांचल की सियासत और ठेकेदारी पर एक ऐसे ब्राह्मण बाहुबली का सिक्का चलता था जिसके आगे मिर्जापुर के सारे किरदार फेल थे, नाम था विजय मिश्रा.
भदोही और ज्ञानपुर के इलाके में कभी जिसकी तूती बोलती थी आज उसका अरबों का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह चुका है. ताजा खबर यह है कि मुंबई में बाहुबली विजय मिश्रा की 100 करोड़ रुपये की एक मिल को कुर्क कर लिया गया है. अपराध की दुनिया से राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले इस बाहुबली की कहानी जितनी आलीशान थी उसका अंत उतना ही दर्दनाक है. आज विजय मिश्रा खुद उम्रकैद काट रहे हैं, पत्नी-बेटा और बहू जेल में हैं, राजनीति खत्म हो चुकी है और संपत्ति लगातार जब्त हो रही है.
कोयले के धंधे से कोर्ट रूम मर्डर तक की कहानी
विजय मिश्रा की कहानी की शुरुआत भदोही और प्रयागराज से होती है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय जब पूर्वांचल में छात्र राजनीति और बाहुबल का केंद्र था, तब विजय मिश्रा विश्वविद्यालय से नहीं बल्कि कोयले और पेट्रोल पंप के अपने कारोबार से ताकत बटोर रहा था. बात साल 1980 की है, जब इलाहाबाद जिला अदालत परिसर में प्रकाश नारायण पांडे नाम के व्यक्ति की सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. इस सनसनीखेज कोर्ट रूम मर्डर में पहली बार विजय मिश्रा का नाम सामने आया. यह वही कांड था जिसने विजय मिश्रा को जरायम की दुनिया में पहचान दी और नियति का खेल देखिए कि इसी केस ने अंत में उसके पतन की स्क्रिप्ट भी लिखी.



