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वैज्ञानिकों ने खोजा बिजली बनाने का सबसे अनोखा तरीका! हवा से पैदा होगी 800V बिजली

वैज्ञानिकों ने खोजा बिजली बनाने का सबसे अनोखा तरीका! हवा से पैदा होगी 800V बिजली

रिसर्चर्स ने बिजली बनाने का एक ऐसा तरीका पेश किया है जिसमें न तार की जरूरत है और न ही किसी पारंपरिक जनरेटर की. इस तकनीक को Contactless Electricity Generation कहा जा रहा है. इसमें सिर्फ कंप्रेस्ड हवा और Tesla Turbine जैसे खास डिजाइन का इस्तेमाल करके Static Electricity को उपयोगी बिजली में बदला जाता है. इस सिस्टम से 800 वोल्ट तक का आउटपुट और 2.5 एम्पियर की करंट जनरेट होने का दावा किया गया है, वो भी बिना किसी अतिरिक्त केमिकल या पार्टिकल के.

Static Electricity अब परेशानी नहीं, काम की चीज
फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स में Static Electricity को अब तक एक समस्या माना जाता रहा है. यह धूल को चिपका देती है, नमी जमा करती है और कई बार सेफ्टी रिस्क भी बन जाती है. लेकिन इस नई तकनीक में यही Static Electricity काम की चीज बन जाती है. हाई वोल्टेज आउटपुट की वजह से यह सिस्टम नेगेटिव आयन बनाता है, जो हवा में मौजूद धूल और नमी को न्यूट्रल करके इकट्ठा करने में मदद करता है. इससे बिजली भी बनती है और एयर क्वालिटी भी बेहतर होती है.

Tesla Turbine से मिली प्रेरणा
इस नई तकनीक की जड़ें करीब 100 साल पुरानी हैं. यह सिस्टम Nikola Tesla के 1913 में पेटेंट किए गए Bladeless Tesla Turbine से प्रेरित है. आम टर्बाइन में ब्लेड होते हैं, जो हवा या पानी को टकराकर घुमाते हैं. लेकिन Tesla Turbine में कोई ब्लेड नहीं होता. इसमें पास-पास लगी चिकनी डिस्क होती हैं, जिनसे हवा चिपककर घूमती है और घर्षण के जरिए घूमने की ताकत पैदा करती है. कम मूविंग पार्ट्स होने की वजह से यह डिजाइन ज्यादा टिकाऊ और कम खराब होने वाला माना जाता है.

पुरानी सोच और नई टेक्नोलॉजी का मेल
नई डिवाइस में Tesla Turbine के इस पुराने कॉन्सेप्ट को Triboelectric Materials के साथ जोड़ा गया है. इसमें घूमने वाली डिस्क, अलग-अलग मटीरियल की लेयर, बेयरिंग और एक ऐक्रेलिक हाउसिंग होती है. जैसे ही कंप्रेस्ड हवा अंदर जाती है, वह तेज घूमने वाला फ्लो बनाती है, जिसकी स्पीड 300 मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच सकती है. सिर्फ सतह के घर्षण से रोटेटर घूमने लगता है और 0.2 MPa प्रेशर पर करीब 8472 RPM की स्पीड हासिल कर लेता है.

इंडस्ट्री के लिए दोहरा फायदा
कई इंडस्ट्रियल यूनिट्स पहले से ही कंप्रेस्ड हवा का इस्तेमाल करती हैं. यह टेक्नोलॉजी उनके लिए दोहरा फायदा लेकर आ सकती है. एक तरफ इससे अतिरिक्त बिजली पैदा की जा सकती है और दूसरी तरफ Static Electricity को न्यूट्रल करके सेफ्टी बेहतर की जा सकती है. इससे आग लगने का खतरा कम होता है, मशीनों की लाइफ बढ़ती है और काम करने का माहौल ज्यादा सुरक्षित बनता है. साथ ही, एनर्जी कॉस्ट कम होने की भी संभावना बनती है.

Static Electricity बनती कैसे है
जब कंप्रेस्ड हवा पाइप्स से गुजरती है, तो उसमें मौजूद धूल के कण और पानी की बूंदें पाइप की दीवारों से रगड़ खाती हैं. इसी रगड़ से इलेक्ट्रॉन्स का लेन-देन होता है और Static Charge बनता है. इस प्रक्रिया को Triboelectric Effect कहा जाता है. अब तक यही चार्ज परेशानी बनता था, लेकिन नई टेक्नोलॉजी इसी चार्ज को कैप्चर करके बिजली में बदल देती है.

इंडस्ट्रियल एनर्जी का भविष्य?
यह तकनीक दिखाती है कि कैसे पुरानी इंजीनियरिंग और आधुनिक मटीरियल साइंस मिलकर बड़ी समस्याओं का हल निकाल सकती हैं. Static Electricity, जिसे अब तक बेकार या खतरनाक माना जाता था, वही अब एनर्जी का नया सोर्स बन सकती है. अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर अपनाई जाती है, तो यह इंडस्ट्री में बिजली बनाने, सेफ्टी सुधारने और एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है.

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