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अभी अभीः देश में इथेनॉल वाले पेट्रोल पर बडी खबर, मोदी सरकार ने किया ये ऐलान

Government on Standard Petrol India: पेट्रोल इस समय देश में सबसे चर्चित मुद्दा बना हुआ है। सरकार देश भर में E20 पेट्रोल लागू कर चुकी है। देश के सभी पेट्रोल पंपो पर यह पेट्रोल मिल रहा है। सरकार से सुरक्षित और बेहतर बता रही है। वहीं, लोगों का कहना है कि इससे उनकी गाड़ियों में दिक्कते आ रही हैं और इसीलिए लोग सरकार से शुद्ध पेट्रोल और इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

अभी अभीः देश में इथेनॉल वाले पेट्रोल पर बडी खबर, मोदी सरकार ने किया ये ऐलान

हालांकि, केंद्र सरकार ने पूरे देश में एक साथ शुद्ध पेट्रोल , E10 और E20 पेट्रोल बेचने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर एक साथ कई तरह के पेट्रोल बेचने से न सिर्फ तेल का खर्च बढ़ेगा, बल्कि इसे हर जगह पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 जुलाई को एक नोट जारी कर यह साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल ही देश का मानक पेट्रोल बना रहेगा।

अलगअलग तरह के पेट्रोल बेचने में क्या दिक्कत?
बड़ा नेटवर्क मंत्रालय के मुताबिक भारत में ईंधन सप्लाई का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है, जिसमें 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप, तेल रिफाइनरियां, डिपो, पाइपलाइन और स्टोरेज टैंक शामिल हैं।
भारी खर्च अगर हर पंप पर तीन अलगअलग तरह के पेट्रोल बेचे जाएंगे, तो सबके लिए अलगअलग स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और गाड़ियां चाहिए होंगी। इससे तेल का मैनेजमेंट और रखरखाव महंगा हो जाएगा।

प्रीमियम पेट्रोल से तुलना गलत सरकार ने उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें लोग प्रीमियम पेट्रोल का उदाहरण दे रहे थे। सरकार ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल बहुत कम मात्रा में बिकता है और इसके लिए पूरे देश में अलग से नया सप्लाई नेटवर्क बनाने की जरूरत नहीं पड़ती है।

इथेनॉल में हो चुका है भारी निवेश

सरकार ने बताया कि देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए फैक्ट्रियों, गोदामों और लॉजिस्टिक्स में बड़ा निवेश किया जा चुका है।

अगर सरकार अब पीछे हटती है और दोबारा E10 को स्टैंडर्ड पेट्रोल बनाती है, तो इथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियां बेकार पड़ी रहेंगी। इससे उन किसानों, कंपनियों, सहकारी समितियों और बैंकों को नुकसान होगा जिन्होंने इसमें पैसा लगाया है।

आंकड़ों के मुताबिक भारत ने नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच पेट्रोल में औसतन 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो पिछले साल 19.2 प्रतिशत था। आप पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी यह नोट ऊपर देख सकते हैं।

पुरानी गाड़ियों को लेकर क्या कहा?
जिन लोगों की गाड़ियां E10 पेट्रोल के लिए बनी थीं और वे E20 से गाड़ी खराब होने की चिंता जता रहे थे। इस पर सरकार ने जवाब दिया

पूरी जांच के बाद फैसला E20 पेट्रोल लाने से पहले कारबाइक निर्माताओं, पार्ट्स सप्लायर्स, टेस्टिंग एजेंसियों और एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई थी। इंजन की मजबूती, पाइप्स, प्रदूषण और माइलेज, हर चीज की अच्छे से जांच की गई थी।

कंपनियों का डेटा सरकार ने मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प का डेटा पेश किया। मारुति ने वित्तीय वर्ष 202526 में 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की। इनमें से 1.5 करोड़ गाड़ियां पुरानी थीं यानी कि जो E20 के लिए नहीं बनी थीं। इसके बावजूद किसी भी गाड़ी में E20 तेल की वजह से जंग लगने या पुर्जे खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली। हीरो मोटोकॉर्प का अनुभव भी ऐसा ही रहा।

माइलेज कम होगा, पर फायदे ज्यादा हैं
माइलेज में कमी सरकार ने माना है कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ियों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की कमी आ सकती है। लेकिन, सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक पहलू है।

अन्य फायदे सरकार का कहना है कि इस नुकसान के बदले ग्राहकों को ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग वाला ईंधन मिल रहा है। साथ ही इससे देश को कच्चा तेल कम आयात करना पड़ रहा है और प्रदूषण भी कम हो रहा है।

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