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Iran-US Tension Explained: ट्रंप और ईरान के बीच फिर बढ़ा टकराव, क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु समझौते पर क्यों अटका मामला?

IranUS Tension Explained: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बीच तीखी बयानबाजी ने युद्धविराम और परमाणु समझौते की उम्मीदों को झटका दिया है।

Iran-US Tension Explained: ट्रंप और ईरान के बीच फिर बढ़ा टकराव, क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु समझौते पर क्यों अटका मामला?

एक तरफ अमेरिका ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की सार्वजनिक गारंटी मांग रहा है, वहीं ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की बात कह रहा है। इसी बीच ओमान और कतर की मध्यस्थता में बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के रुख में फिलहाल कोई नरमी नजर नहीं आ रही।

क्या है पूरा विवाद और क्यों बढ़ा तनाव?

तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर की ओर मिसाइलें दागीं।

इसके बाद दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते पर संकट गहरा गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, तब तक किसी भी परमाणु समझौते पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा।

ट्रंप और खामेनेई के बीच क्यों बढ़ी जुबानी जंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन पर हमला करने या हत्या की कोशिश की गई तो अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले करेगा।

यह बयान उस समय आया जब पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ नारे लगाए गए।

वहीं नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उनके पिता की मौत का बदला लेना पूरे देश की इच्छा है और इसे पूरा किया जाएगा। दोनों नेताओं के बयानों ने तनाव को और बढ़ा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती थी। ईरान इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण चाहता है और यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की मांग कर रहा है।

दूसरी ओर अमेरिका और कई पश्चिमी देश इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानते हैं और चाहते हैं कि यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोकटोक के जारी रहे। इसी विवाद ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाला और तेल की कीमतें युद्ध के दौरान 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

परमाणु कार्यक्रम पर क्यों अटका समझौता

तनाव की दूसरी बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का पूरा भंडार सौंप दे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो उनके पास सैन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह अपना यूरेनियम भंडार किसी भी कीमत पर नहीं सौंपेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि ईरान दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जो परमाणु हथियार कार्यक्रम घोषित किए बिना हथियार स्तर के करीब तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है।

बातचीत जारी, लेकिन समाधान अभी दूर

तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान पहुंचे, जहां उन्होंने समुद्री सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत की। कतर ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए रखा है।

हालांकि अमेरिका ने ईरान को डॉलर में कच्चा तेल बेचने की छूट खत्म कर दी है, जिसे तेहरान ने अंतरिम समझौते का उल्लंघन बताया है। फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं। ऐसे में मध्य पूर्व में शांति बहाल होने की संभावना फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।

 

 

 

 

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