Supreme Court on Gyanvapi Case: ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब समाधान की दिशा में मध्यस्थता की कोशिश शुरू होने जा रही है। हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी के अनुसार, 14 जुलाई को हिंदू और मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर बातचीत कर सकते हैं। उद्देश्य यह है कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकाला जाए।

ज्ञानवापी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे कोई अंतिम फैसला देने के बजाय दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेश के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं और अब मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो ज्ञानवापी विवाद से जुड़े अन्य मामलों के समाधान का रास्ता भी खुल सकता है।
किन मामलों पर होगी मध्यस्थता?
हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी के मुताबिक, फिलहाल दो प्रमुख मामलों को मध्यस्थता के लिए चिन्हित किया गया है उसमें राखी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और शैलेंद्र सिंह व्यास बनाम अंजुमन इंतजामिया मामला है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में दोनों पक्षों के वादियों को बुलाकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया जाता है।
हिंदू पक्ष ने ASI रिपोर्ट का किया जिक्र
सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने का सर्वे किया था। उनके अनुसार, सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर हिंदू देवीदेवताओं तथा सनातन परंपरा से जुड़े कई प्रतीक मिलने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ASI रिपोर्ट में संरचना के संबंध में महत्वपूर्ण निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग, स्वास्तिक, ‘ॐ’ और त्रिशूल जैसे चिन्हों का भी उल्लेख किया।
समझौता हुआ तो हर्जाना नहीं मांगेंगे
हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि यदि मध्यस्थता के दौरान मुस्लिम पक्ष समझौते के लिए तैयार होता है, तो हिंदू पक्ष अदालत से किसी प्रकार के हर्जाने की मांग नहीं करेगा। हालांकि, यह हिंदू पक्ष की ओर से रखा गया दावा है और इस पर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
तहखाने में जारी है पूजा
गौरतलब है कि द्वारा पहले निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के बाद व्यास जी के तहखाने में पूजाअर्चना जारी है। सर्वे के दौरान मिली प्रतिमाओं की स्थापना के बाद वहां नियमित पूजा की जा रही है।
ज्ञानवापी विवाद फिलहाल विभिन्न न्यायिक प्रक्रियाओं के अधीन है और मध्यस्थता की यह पहल इस लंबे समय से चले आ रहे मामले के संभावित समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


