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‘मैं अपने दर्द की किताब लिखूं तो लोग इश्क से डर…’, इस इरादे से होटल गए शादीशुदा युगल

कानपुर। कानपुर के घंटाघर के होटल सूर्या में शादीशुदा प्रेमी युगल ने खुदकुशी कर ली। प्रेमी युगल जान देने के इरादे से ही होटल में पहुंचा था। पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों शनिवार को घर से ही जान देने के इरादे से निकले। होटल पहुंचने से पहले दिग्विजय ने फतेहपुर स्टेशन से इंस्टाग्राम पर एक दर्दभरी रील पोस्ट की।

‘मैं अपने दर्द की किताब लिखूं तो लोग इश्क से डर…’, इस इरादे से होटल गए शादीशुदा युगल

इसमें लिखा कि मैं अपने दर्द की किताब लिखूं तो लोग इश्क से डर जाएंगे… मैं मरने जा रहा हूं। इसके साथ एक रील में कहा कि कैसे कह दूं कि उसकी मोहब्बत झूठी है… उसके हाथों से निवाला खाया है मैंने। साथ ही एक पोस्ट में कहा कि पसर्नल लाइफ से परेशान हूं… अब थोड़ा अपनी इमेज सुधारना चाहता हूं।

शिवांगी के पति धीरू तिवारी ने बताया कि करीब एक साल पहले पत्नी शिवांगी की फेसबुक के जरिये दिग्विजय से दोस्ती हुई। उनके गुजरात में रहने का फायदा उठाकर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। पुलिस के अनुसार जहर निगलने के बाद शिवांगी ने अपने पति को आखिरी बार फोन किया।

आवाज में दर्द था। उसने सिर्फ इतना कहा कि मैंने जहर खा लिया है… अब बच्चों के साथ मजे से रहना और फोन कट गया। पुलिस को जांच में पता चला कि नौ जून को दिग्विजय और शिवांगी परिवार को छोड़कर गुजरात चले गए थे जहां से उन्नाव पुलिस ने उन्हें ढूंढ निकाला था। पुलिस ने दोनों को इस शर्त पर छोड़ा कि अब दोनों आपस में कोई संबंध नहीं रखेंगे।

दोनों के थाने में ही सिमकार्ड तोड़ दिए गए और दोनों नया मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने लगे लेकिन एक महीने के भीतर ही उनकी फिर से बातचीत शुरू हो गई। एसीपी कलक्टरगंज आनंद ओझा ने बताया कि मामले में कॉल डिटेल, सोशल मीडिया पोस्ट और चैट के आधार पर पुलिस पहले से बनाई गई सुसाइड की योजना मानकर पूरे मामले की जांच कर रही है।

दो जिंदगी पर भारी पड़े… कमरे में बीते साढ़े तीन घंटे

कानपुर के घंटाघर के सूर्या होटल के जिस कमरा नंबर 106 में शिवांगी और दिग्विजय शनिवार दोपहर से ठहरे थे। उस कमरे में साढ़े तीन घंटे के भीतर आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने अपनी जिंदगी ही खत्म करने का फैसला कर लिया। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस न सिर्फ होटल कर्मियों से एकएक मिनट की जानकारी ले रही है, बल्कि वहां लगे सीसीटीवी के फुटेज को गंभीरता से देख रही है। दोनों के मोबाइल की कॉल डिटेल और व्हाट्सअप चैट खंगाली जा रही है।

पुलिस की मानें तो दोपहर 12:30 बजे जब शिवांगी और दिग्विजय होटल में प्रवेश कर रहे थे तो जैसा कि फुटेज में दिखाई दे रहा है, उनके चेहरों पर कोई शिकन जैसे कोई भाव नहीं थे, जो कि आत्महत्या का संकेत दे रहो हो। कमरे में जाने के बाद दोनों ने कमरा भी बंद नहीं किया और बाहर भी नहीं निकले। शाम करीब चार बजे शिवांगी के चीखने पर घटना प्रकाश में आई।

यह भी हो सकता है कि दोनों में आपस में ही किसी बात को लेकर विवाद हुआ हो। फिलहाल पुलिस हर बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो वे दोनों पहले भी सूर्या होटल रुके होंगे। यह होटल गली का अकेला होटल है, जबकि उसके बगल वाली गली में कई होटल बने हुए हैं। इससे पहले दोनों कब होटल आए, इसके लिए वहां का रजिस्टर खंगाला जा रहा है।

पढ़ाई के साथ कचहरी में प्रैक्टिस करती थी शिवांगी
शिवांगी सदर कोतवाली के मोहल्ला अकरमपुर की रहने वाली थी। वकालत की पढ़ाई करने के साथ शहर के अधिवक्ता के बस्ते पर प्रैक्टिस करती थी। हालांकि दिग्विजय से रिश्ते के चलते परिवार में कलह बढ़ने से वह जनवरी से कचहरी नहीं गई थी। शिवांगी का पति स्कूल में वैन चलवाता था, लेकिन तीन महीने से वह गुजरात में हैं। शिवांगी के 12 साल का बेटा और नौ साल की बेटी है।

पुरवा कोतवाली के भादिन गांव की रहने वाली शिवांगी की शादी 15 साल पहले सदर कोतवाली के अकरमपुर मोहल्ला निवासी धीरू तिवारी से हुई थी। बच्चों की अच्छी परवरिश व शिवांगी को पढ़ाने के लिए दामाद धीरू तीन महीने पहले गुजरात के अहमदाबाद कमाने चला गया था। शिवांगी के पिता राजेंद्र शुक्ला व अन्य परिजन सूचना मिलते ही कानपुर के लिए रवाना हो गए।

बिना तलाक चाहती थी सहमति संबंध
पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि शिवांगी पढ़ाई के साथसाथ उनके बस्ते पर सीखने के लिए भी आती थीं। कुछ दिन पहले फोन करके शिवांगी ने दिग्विजय के साथ सहमति संबंध के लिए न्यायालय से कुछ ऐसा आदेश दिलाने की बात भी की थी, जिससे परिवार के लोग उन्हें परेशान न करें। वह बिना तलाक ही सहमति संबंध चाहती थी।

बोली थी, सहेली को देखने जा रही है कानपुर
मां के अनुसार शनिवार दोपहर करीब 12 बजे शिवांगी ने पिता राजेंद्र शुक्ल को फोन किया था। बताया था कि उसकी सहेली की तबीयत खराब है। उसे देखने कानपुर जा रही है। मां ने बताया कि दामाद को सूचना दे दी गई है। वह घर आने के लिए निकले हैं।

मथुरा ड्यूटी पर जाने की बात कहकर निकला था दिग्विजय
फतेहपुर। राधानगर पुलिस से दिग्विजय की मौत की जानकारी मिलते ही उसके चाचा आशीष सिंह, जयप्रकाश सिंह शनिवार रात कानपुर के लिए निकल गए। राधानगर थाना क्षेत्र के रमवां गांव के मूल निवासी दिग्विजय कई वर्षों से परिवार के साथ शहर के राधानगर थाना क्षेत्र स्थित सुंदरमती इंटर कॉलेज पूर्वी नई बस्ती में रह रहा था। वर्ष 2013 में उसकी शादी कीर्तिखेड़ा निवासी वंदना से हुई थी। दोनों का 10 वर्षीय बेटा ज्ञान सिंह है। दिग्विजय के छोटे भाई का नाम अभिमर्दन सिंह है।

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