Home Protection From Snakes Naturally: बरसात का मौसम आते ही खेतों, बगीचों और रिहायशी इलाकों में सांपों के दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोगों के मन में डर होना स्वाभाविक है। हालांकि, सबसे सुरक्षित उपाय है कि घर और आसपास की जगह साफसुथरी रखें और यदि सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने के लिए प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग से संपर्क करें।

कुछ लोग ऐसे पौधे भी लगाते हैं जिनकी गंध या बनावट के कारण सांप उस जगह के आसपास कम दिखाई दे सकते हैं, हालांकि इसका वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है।
क्या कुछ पौधे सचमुच सांपों को दूर रखने में मदद कर सकते हैं?
यह मान्यता प्रचलित है कि कुछ पौधों की तेज गंध या कांटेदार बनावट के कारण सांप उनके आसपास आने से बचते हैं। हालांकि, इन्हें सांपों से पूरी सुरक्षा का पक्का उपाय नहीं माना जा सकता। इन्हें केवल सहायक उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है।
गेंदा का पौधा बना सकता है घर के आसपास का माहौल कम आकर्षक
कई लोगों का मानना है कि गेंदे के पौधे की जड़ों से निकलने वाली तेज गंध नहीं आती। इसी वजह से लोग इसे घर की बाउंड्री, मुख्य गेट या गार्डन के किनारों पर लगाना पसंद करते हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाले मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
कांटेदार पौधे बना सकते हैं प्राकृतिक अवरोध
स्नेक प्लांट और नागफनी जैसे पौधों को कई लोग घर के आसपास लगाते हैं। विशेष रूप से नागफनी जैसे एक प्राकृतिक अवरोध का काम कर सकते हैं। माना जाता है कि सांप ऐसे स्थानों से बचने की कोशिश करते हैं जहां आगे बढ़ना मुश्किल हो, लेकिन इसे भी पूरी तरह भरोसेमंद उपाय नहीं माना जा सकता।
लेमन ग्रास की तेज खुशबू भी मानी जाती है असरदार
लेमन ग्रास सिर्फ चाय की खुशबू बढ़ाने के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसकी तेज साइट्रस महक के कारण इसे प्राकृतिक रिपेलेंट के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग इसे घर के आसपास लगाना पसंद करते हैं ताकि वातावरण कम आकर्षक बने, हालांकि इस प्रभाव पर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
सिर्फ पौधों पर न रहें निर्भर, ये सावधानियां भी हैं जरूरी
घर के आसपास झाड़ियां, कचरा और लकड़ियों का ढेर जमा न होने दें। घास की नियमित कटाई करें, दीवारों और पाइपों की दरारें बंद रखें तथा रात में बाहर पर्याप्त रोशनी रखें। यदि घर में या आसपास सांप दिखाई दे, तो उसे स्वयं पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। सुरक्षित दूरी बनाकर तुरंत वन विभाग या स्थानीय स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।



