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प्रयागराज माघ मेले में बड़ा हादसा! अचानक धधक उठा साधु का शिविर, आग की लपटें देख मची अफरा-तफरी

Prayagraj A Massive Fire Broke Out At Camp During The Magh Mela

Prayagraj Magh Mela Fire Accident: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के एक शिविर में अचानक भीषण आग लगई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आज मंगलवार शाम को सेक्टर 5 स्थित मेला क्षेत्र के एक शिविर में आग लगने से भगदड़ मच गई। आग की लपटे देख लोग वहां से भागने लगे। आनन-फानन में सूचना मेला प्रशासन तक पहुंचाई गई, जिसके बाद मौके पर पुलिस और अग्निशमन दल के कर्मी पहुंचे। राहत और बचाव कार्य जारी है। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

बता दें कि यह घटना माघ मेले में लगे नारायण शुक्ला धाम शिविर का बताया जा रहा है। आग की चपेट में आने से 15 टेंट और 20 दुकानें जलकर राख हो गईं। शिविर में कल्पवास कर रहे लोग जान बचाकर भागे। अभी तक किसी किसी भी तरह के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

मौके पर दमकल की 5 गाड़ियां मौजूद

मेला शिविर सेक्टर-5 में है। भीषण रूप से लगी आग की लपटें और धुआं 5 किलोमीटर दूर से ही दिख रहा है। पुलिस और संतों ने बचाव कार्य शुरू किया है। दमकल की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं। आग रुक-रुककर आग भड़क रही है। आग लगने के पीछे शार्ट सर्किट वजह बताई जा रही है।

मेले में आग लगने की वजह क्या?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज माघ मेले में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है, जिससे टेंटों में अचानक आग फैल गई। हालांकि, आधिकारिक रूप से इस मामले को लेकर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

राहत-बचाव कार्य जारी

बता दें कि घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंची गई और आग पर काबू पाने की प्रयास में जुट गई। वहीं, मेला के सुरक्षा में लगे कर्मियों और अधिकारियों ने बिना देर किए आसपास के शिविरों को भी खाली कराया, ताकि आग के फैलने का खतरा कम किया जा सके। कल्पवासियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और प्राथमिक सुरक्षा के बाद राहत कार्य जारी है। किसी भी व्यक्ति के घायल होने की अभी सूचना नहीं है।

3 जनवरी से मेले की शुरुआत

प्रयागराज का माघ मेला 2026 आस्था और आध्यात्मिकता का एक भव्य समागम है, जिसकी शुरुआत 3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा) से हो चुकी है। संगम की रेती पर लगने वाला यह ‘मिनी कुंभ’ 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा। लगभग 44 दिनों के इस मेले में लाखों कल्पवासी और श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर पवित्र डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं।

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