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मकर संक्रांति पर घर बैठे देखें ये 5 बॉलीवुड फिल्में, उत्सव के रंग में हो जाएंगे सरबोर

Raees To Kai Po Che 5 Bollywood Movies To Watch On Makar Sankranti Festival

Makar Sankranti Movies: मकर संक्रांति या उत्तरायण का त्योहार भारत में बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों के बीच इस दिन का उत्साह अलग ही होता है। अगर आप इस साल भीड़भाड़ से दूर अपने घर पर परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फिल्में आपके उत्सव को और भी यादगार बना सकती हैं।

इन बॉलीवुड फिल्मों में न केवल मकर संक्रांति की खूबसूरती को दिखाया गया है, बल्कि भारतीय संस्कृति और रिश्तों के गहरे पहलुओं को भी पिरोया गया है। आइए डालते हैं एक नजर उन 5 बॉलीवुड फिल्मों पर, जिन्हें देखकर आप मकर संक्रांति के उत्सव के रंगों में पूरी तरह सराबोर हो जाएंगे।

रईस और काय पो चे: गुजरात की जीवंत संक्रांति

गुजरात की मकर संक्रांति पूरी दुनिया में मशहूर है और फिल्म ‘रईस’ इसे बड़े पर्दे पर बखूबी दिखाती है। शाहरुख खान पर फिल्माया गाना ‘उड़ी उड़ी जाए’ उत्तरायण के वास्तविक उल्लास, पतंगबाजी की प्रतिस्पर्धा और गरबा का अद्भुत मेल है। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘काय पो चे!’ तो मकर संक्रांति के बिना अधूरी लगती है। बॉलीवुड फिल्म का नाम ही पतंग काटने पर बोले जाने वाले गुजराती नारे पर आधारित है। यह फिल्म दोस्ती, सपनों और साबरमती के तट पर उड़ती पतंगों के जरिए एक बेहद इमोशनल कहानी कहती है।

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हम दिल दे चुके सनम: रिश्तों और पतंगों की डोर

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ ने मकर संक्रांति को एक रोमांटिक और पारिवारिक उत्सव के रूप में स्थापित किया। फिल्म का गाना ‘ढील दे दे रे भैया’ आज भी हर संक्रांति पर छतों पर बजता सुनाई देता है। सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बीच पतंग के पेंच के जरिए दिखाया गया रोमांस और एक बड़े गुजराती परिवार का जश्न इस फिल्म को त्यौहार पर देखने के लिए सबसे परफेक्ट चुनाव बनाता है। यह फिल्म परंपरा और प्रेम का एक खूबसूरत संगम है।

1947 अर्थ और दिल्ली-6: पुरानी गलियों का जश्न

आमिर खान स्टारर फिल्म ‘1947 अर्थ’ में पतंगबाजी का एक बेहद मार्मिक और खूबसूरत दृश्य है, जो ‘रुत आ गई रे’ गाने के जरिए दिखाया गया है। यह फिल्म पुराने दौर की संक्रांति की याद दिलाती है। इसी तरह अभिषेक बच्चन की फिल्म ‘दिल्ली-6’ में पुरानी दिल्ली की छतों पर होने वाली पतंगबाजी को ‘मसकली’ जैसे गानों के बैकग्राउंड में दिखाया गया है। ये फिल्में बताती हैं कि कैसे एक छोटी सी पतंग पूरे मोहल्ले और अलग-अलग संस्कृतियों को एक धागे में पिरो देने की ताकत रखती है।

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