भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। लंबे समय से चल रही आईडीबीआई बैंक की विनिवेश प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सरकार ने कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स द्वारा दिए गए ऑफर को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले पर मुहर मंगलवार को वित्त मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान लगाई गई। वर्तमान में आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की संयुक्त रूप से 95 फीसदी हिस्सेदारी है। प्रस्तावित समझौते के तहत, सरकार और एलआईसी मिलकर बैंक में अपनी 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे।

इस विनिवेश प्रक्रिया से सरकारी खजाने में लगभग 53,000 करोड़ रुपये की राशि आने का अनुमान है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय बैंकिंग इतिहास में किसी भी विदेशी निवेश के मामले में सबसे बड़ा सौदा साबित हो सकता है। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेयरफैक्स होल्डिंग्स ने अपनी शुरुआती बोली में संशोधन करते हुए इसे 81 रुपये प्रति शेयर तक बढ़ा दिया है। इस मूल्यांकन पर, बैंक में 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार अकेले लगभग 26,620 करोड़ रुपये जुटाने की स्थिति में है। इसके अतिरिक्त, एलआईसी भी अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है।
इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक अधिकारप्राप्त मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वयं शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार और फेयरफैक्स के बीच शर्तों पर सहमति बन चुकी है। अब औपचारिक नोटिफिकेशन के बाद ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ जारी किया जाएगा, जिसके पश्चात शेयरखरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस प्रक्रिया का अगला चरण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अंतिम जांच और सीसीआई सहित अन्य नियामक संस्थाओं से प्राप्त होने वाली मंजूरी पर निर्भर करेगा। कनाडाई नागरिक प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स को बैंकिंग नियमों के अनुसार पब्लिक शेयरधारकों के लिए अनिवार्य ओपन ऑफर भी पेश करना होगा।
आईडीबीआई बैंक का इतिहास देखा जाए तो 2019 में एलआईसी ने 21,624 करोड़ रुपये के निवेश से बैंक की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसके बाद इसे निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में अधिसूचित किया गया था। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि फेयरफैक्स के पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद सीएसबी बैंक और इस प्रस्तावित सौदे के विलय की संभावनाएं भी भविष्य में बन सकती हैं। विनिवेश के इस बड़े कदम का उद्देश्य सरकार के चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 80,000 करोड़ रुपये के एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य को पूरा करना है। बाजार में भी इस खबर का असर दिखने लगा है और पिछले कुछ समय में बैंक के शेयरों में लगभग 42 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।



