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Myths Vs Facts: किन लोगों के लिए चांदी के बर्तन में पानी पीना है फायदेमंद? आयुर्वेद में जानें इसका महत्व

Silver Water Benefits In Ayurveda: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब और आयुर्वेद में भी चांदी के बर्तन में पानी पीने के फायदों का वर्णन मिलता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चांदी का संबंध शुद्धता, शांति और चंद्रमा से होता है। इसके साथ ही लाल किताब में भी चांदी के गिलास में पानी पीना लाभकारी माना गया है।

Myths Vs Facts: किन लोगों के लिए चांदी के बर्तन में पानी पीना है फायदेमंद? आयुर्वेद में जानें इसका महत्व

चांदी के गिलास में रखा जल पीने से यह जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। साथ ही, इससे मानसिक शांति बनी रहती है। अगर कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो, तो चांदी के बर्तन में पानी पीने से चंद्रमा मजबूत स्थिति में आ सकता है।

चांदी के बर्तन में पानी पीने के फायदे

चांदी जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करने में सहायक है। अगर आप अत्यधिक चिंतित व परेशान रहते हैं, तो यह उपाय करके देख सकते हैं। यह अधिक चिंता और तनाव से भी राहत देता है। चांदी में रोगाणुरोधी गुण होते हैं। इसलिए चांदी के पात्र में रखा पानी पीने से यह पित्त, कफ और वात को संतुलित रखता है। यह धातु चंद्रमा को मजबूत करने के साथसाथ संबंधों में गहराई और करुणा को भी बढ़ावा देता है।

इम्युनिटी को करता है स्ट्रॉन्ग

चांदी के बर्तन में पानी पीने से इम्युनिटी मजबूत होती है। माना जाता है कि यह शरीर के सूजन और जीवाणु संक्रमण को कम करती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। इसके अलावा चांदी शरीर के पीएच को भी बैलेंस करती है। यह पॉलीफेनोल और फ्लेवोनोइड जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो गठिया, मनोभ्रंश की समस्या में राहत देती है।

बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाता है

चांदी पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया को भी मारता है और पानी को शुद्ध करता है। चांदी के गिलास या बोतलों में रखा पानी लंबे समय तक पीने के लिए सुरक्षित माना जाता है। चांदी के एंटीसेप्टिक गुण हैजा और टाइफाइड जैसी पानी से होने वाली बीमारियों से बचाता हैं।

क्या कहता है आयुर्वेद

जिन लोगों के शरीर की प्रकृति पित्त दोष वाली है, उनके लिए चांदी का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद हो सकता है। आयुर्वेद में देने और शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला धातु बताया गया है। यह पित्त दोष को कम करने में मदद करता है। पित्त दोष बढ़ने से शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ जाती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं जैसे खट्टी डकार, पेट में जलन की समस्या होने लगती है। के बढ़ने से त्वचा पर मुंहासे और चकत्ते, अत्यधिक पसीना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन व गुस्सा आना जैसे लक्षण महसूस होते हैं। इन सबके प्रभाव को कम करने में चांदी कुछ हद तक कारगर है। इसी तरह गुस्से को कंट्रोल में रखने के लिए भी चांदी के गिलास में पानी पीने से फायदा होता है।

किन राशि वालों को चांदी के बर्तन में पीना चाहिए पानी

  • अगर किसी की कुंडली में चंद्रमा वृश्चिक राशि में हो या चंद्रमा शनि की युति से विष योग बन रहा हो, तो चांदी के बर्तन में रखा पानी पीना लाभदायक होता है।
  • कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए चांदी के गिलास में पानी पीना बेहद लाभदायक होता है। ये तीनों राशियां जल तत्व से संबंधित होती हैं। ऐसे में चांदी के पात्र में पानी पीना शुभ हो सकता है।
  • आयुर्वेद के अनुसार, चांदी धातु नींद संबंधी समस्या और हार्मोनल असंतुलन से राहत दिलाने में सहायक होता हैं।

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