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घग्गर की बाढ़ को लेकर मान सरकार पर तीखा हमला, लालपुरा बोले- ‘लोग हर साल डूबते हैं, किसान बर्बाद होते हैं और सरकार सिर्फ दावे करती है’

ज़ीरकपुर : अमित कालिया ज़ीरकपुर के क्लियो होटल में आयोजित बैठक से पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष इक़बाल सिंह लालपुरा, भाजपा के पंजाब सचिव व हलका इंचार्ज संजीव खन्ना और गुरदर्शन सिंह सैनी ने घग्गर नदी के आसपास के उन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जो हर वर्ष बरसात के दौरान नदी में पानी बढ़ने से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। नेताओं ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर बाढ़ से होने वाले नुकसान की जानकारी ली और प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने के बाद बैठक में सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

घग्गर की बाढ़ को लेकर मान सरकार पर तीखा हमला, लालपुरा बोले- ‘लोग हर साल डूबते हैं, किसान बर्बाद होते हैं और सरकार सिर्फ दावे करती है’

बैठक के दौरान इक़बाल सिंह लालपुरा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर घग्गर नदी से हर वर्ष आने वाली बाढ़ को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही, कमजोर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समय रहते ठोस कदम न उठाने के कारण ज़ीरकपुर और आसपास के हजारों लोगों को हर मानसून में भारी नुकसान झेलना पड़ता है।

लालपुरा ने कहा कि घग्गर नदी का जलस्तर बढ़ने पर बलटाना, ज़ीरकपुर, साधांपुर, खजूर मंडी, टिवाना , आलमगीर और अमलाला सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति बन जाती है। लोगों के घरों, दुकानों, वाहनों और खेती को नुकसान पहुंचता है, लेकिन सरकार हर साल केवल आश्वासन देती है और हालात जस के तस बने रहते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि घग्गर नदी की बाढ़ से हर वर्ष हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद राज्य सरकार किसानों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को मुआवजा स्वीकृत भी होता है, उन्हें भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है।

लालपुरा ने दावा किया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों की हरसंभव सहायता की, जबकि पंजाब सरकार राहत और पुनर्वास के मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा इस पूरे मामले को पंजाब के राज्यपाल के समक्ष प्रमुखता से उठाएगी और राज्य सरकार से जवाब मांगेगी कि आखिर बाढ़ रोकने तथा पीड़ितों को राहत देने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते घग्गर नदी की ड्रेजिंग, तटबंधों की मजबूती, नालों की सफाई और वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था पर काम किया जाता तो हर वर्ष लोगों को इस त्रासदी का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विज्ञापनों और दावों तक सीमित है, जबकि ज़मीन पर विकास और आपदा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति पूरी तरह अलग दिखाई देती है।

भाजपा के पंजाब महासचिव व हलका इंचार्ज संजीव खन्ना ने कहा कि बरसात का मौसम हर वर्ष आता है, लेकिन सरकार की तैयारी हर बार नदारद रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि घग्गर नदी की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम और बाढ़ सुरक्षा कार्य समय रहते पूरे नहीं किए जाते, जिसकी कीमत आम जनता को अपने घरों, कारोबार और संपत्ति के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ती है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि सुखना चो, बलटाना और भंकरपुर की विभिन्न हाउसिंग सोसाइटियों में हर वर्ष भारी जलभराव और बाढ़ के कारण लोगों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अभी भी नहीं चेती तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

भाजपा नेता गुरदर्शन सिंह सैनी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग अब सरकारी घोषणाओं से नहीं बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतिगत विफलताओं के कारण हर वर्ष वही इलाके जलमग्न होते हैं और लोगों को राहत के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों के साथसाथ किसानों को भी बिना किसी भेदभाव के शीघ्र मुआवजा दिया जाए तथा घग्गर नदी से जुड़े बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए।

बैठक में उपस्थित भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही बाढ़ सुरक्षा, किसानों और बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे तथा घग्गर नदी के स्थायी समाधान को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए तो भाजपा इस मुद्दे को गांवगांव और शहरशहर लेकर जाएगी तथा विधानसभा से लेकर राज्यपाल और केंद्र सरकार तक इसे प्रमुखता से उठाएगी। नेताओं का कहना था कि जनता अब आश्वासनों से नहीं बल्कि ज़मीनी परिणाम चाहती है।

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