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‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर JPC की लखनऊ बैठक संपन्न, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से समिति ने मांगे अहम सुझाव

One Nation One Election Meeting: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से संबंधित संविधान संशोधन विधेयकों पर गठित संयुक्त संसदीय समिति की उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन दिवसीय विचारविमर्श बैठक बुधवार को संपन्न हुई। समिति ने बैठक के अंतिम दिन प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों, निदेशकों, विधि और राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के प्रमुखों से उनके सुझाव लिए।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर JPC की लखनऊ बैठक संपन्न, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से समिति ने मांगे अहम सुझाव
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर JPC की लखनऊ बैठक संपन्न, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से समिति ने मांगे अहम सुझाव

प्रदेश कई नामी संस्थानों ने लिया हिस्सा

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ; बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी; भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान , कानपुर; रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी; डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, प्रयागराज; बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ; लखनऊ विश्वविद्यालय; भारतीय प्रबंधन संस्थान , लखनऊ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के प्रतिनिधि समिति के समक्ष अपने विचार रखने वाले प्रमुख संस्थान रहे।

इन प्रमुख मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान शिक्षाविदों ने प्रस्तावित विधेयक पर अपने विचार प्रस्तुत किए। चर्चा में केंद्रराज्य संबंध, मध्यावधि चुनावों की स्थिति, शेष कार्यकाल, एक साथ चुनावों की प्रणाली की स्थिरता, निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियां तथा चुनावी सुधारों से जुड़े विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से विचारविमर्श हुआ।

समिति ने विभिन्न बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण

के सदस्यों ने विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों और टिप्पणियों पर गहन चर्चा की और विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। कई प्रश्नों के जवाब बैठक के दौरान ही दे दिए गए, जबकि कुछ कठिन विषयों पर संबंधित विशेषज्ञों के अनुरोध पर समिति ने बाद में लिखित रूप में उत्तर देने की अनुमति दी।

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समिति ने पद्म पुरस्कार विजेताओं से भी किया संवाद

संयुक्त संसदीय समिति ने उत्तर प्रदेश के , नागरिक समाज के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ भी संवाद किया। संसदीय समिति ने इस पहल में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए उनके विचारों और सुझावों को गंभीरता से सुना। साथ ही समिति के सदस्यों ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों एवं उनके विभिन्न आयामों से भी उन्हें अवगत कराया।

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