
असम की 16 वर्षीय पैरा-साइकिलिस्ट लिशा दास ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इसके साथ ही लिशा भारतीय दल की सबसे कम उम्र की एथलीट बन गई हैं। वह पैरा ट्रैक साइकिलिंग स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
एक हाथ से लिखी सफलता की कहानी
असम के बिस्वनाथ जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा लिशा दास का जन्म 8 जून 2010 को हुआ था। वह तेजपुर निवासी निर्मल दास और रुक्मिणी भूमिज दास की बेटी हैं।
शारीरिक चुनौती के बावजूद केवल एक हाथ से प्रतिस्पर्धा करते हुए लिशा ने जिस दृढ़ संकल्प और साहस का परिचय दिया है, वह उन्हें देश की प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शामिल करता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन
कम उम्र में ही लिशा कई बड़ी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं—
- 2025 नेशनल पैरा रोड साइकिलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- लाना कप में दो स्वर्ण पदक
- कोराट कप में कांस्य पदक
- 2026 एशियन पैरा ट्रैक चैंपियनशिप में दो रजत और तीन कांस्य पदक
इन शानदार प्रदर्शनों के आधार पर उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह मिली।
बिस्वनाथ की पहली कॉमनवेल्थ एथलीट
अंतरराष्ट्रीय एथलीट हृदयानंद दास ने कहा कि यह पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है। उनके अनुसार, लिशा दास बिस्वनाथ जिले की पहली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि लिशा ग्लासगो में भारत के लिए पदक जीतकर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगी।
स्कूल ने किया सम्मानित
लिशा के चयन पर जवाहर नवोदय विद्यालय, बिस्वनाथ ने विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। स्कूल प्रबंधन ने उनकी उपलब्धि को पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया।
असम की उम्मीदें भी बढ़ीं
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लिशा दास के अलावा असम की ओर से ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन तथा लॉन बॉल्स खिलाड़ी नयन मोनी सैकिया और पुतुल सोनोवाल भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
लिशा दास की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।



