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झारखंड में माओवादियों पर बड़ा प्रहार, अब सिर्फ 32 इनामी नक्सली बाकी

 रांची
झारखंड पुलिस, केंद्रीय बल, राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने राज्य में माओवादियों की कमर तोड़ डाली है। सभी एजेंसियों ने अपनेअपने हिस्से की जिम्मेदारी का पूरी तरह निर्वहन किया है। किसी ने सूचना जुटाई तो किसी की अभेद घेराबंदी में माओवादी फंसे।

झारखंड में माओवादियों पर बड़ा प्रहार, अब सिर्फ 32 इनामी नक्सली बाकी

जिस धन के बल पर वे जंग जीतने चले थे, वह धन भी नहीं रहा। आर्थिक चोट से लेकर सामाजिक चोट तक पहुंचाने में सरकारी तंत्र सफल रहा, जिसका परिणाम सामने है, माओवादी घुटने टेक चुके हैं। अब नहीं के बराबर बचे हैं।

जो बचे भी हैं वे भूमिगत हो चुके हैं और उनकी तलाश चल रही है। झारखंड सरकार की सूची में अब केवल 32 इनामी माओवादी ही बचे हैं, जिन्हें एजेंसियां खोज रही हैं। वे अपनाअपना क्षेत्र छोड़कर फरार हो चुके हैं।

माओवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात रहे झारखंड में अमनचैन व शांति बहाल के लिए राज्य व केंद्र सरकार ने मिलकर पूरी ताकत झोंक दी थी। झारखंड पुलिस की झारखंड सशस्त्र पुलिस , इंडिया रिजर्व बटालियन और एसटीएफ या झारखंड जगुआर की टुकड़ियों को माओवादियों के विरुद्ध लगाया। स्माल एक्शन टीम को भी इसमें लगाया।

इसके अलावा माओवादियों पर कारगर प्रहार के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की करीब 150 कंपनियों को तैनात किया। गुरिल्ला वार सहित जंगलों में कारगर अभियान चलाने में सक्षम सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की कई कंपनियों को तैनात किया।

माओवादियों के विरुद्ध गुप्त सूचना के लिए झारखंड सरकार की खुफिया एजेंसी विशेष शाखा, एसआइबी के अलावा केंद्रीय खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो तक को लगाया। खुफिया सूचनाओं पर उपरोक्त बलों ने माओवादियों की घेराबंदी की और सफलता हासिल की।

झारखंड पुलिस व NIA ने अपने अधीन ली जांच
माओवादियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकियों ने यूएपी अधिनियम या गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम को जोड़ा गया। झारखंड पुलिस के थानों के अनुसंधानकर्ताओं ने इस अधिनियम के तहत माओवादियों की घेराबंदी शुरू की।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग के तहत राज्य में माओवादियों के विरुद्ध आधा दर्जन से अधिक मामले की जांच शुरू की। बड़ेबड़े माओवादियों के विरुद्ध बड़े खुलासे किए।

एनआइए ने राज्य में दुर्दांत रहे कुख्यात संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया के सुप्रीमो दिनेश गोप को नेपाल से गिरफ्तार किया। एकएक कर सभी संगठन समाप्त होते चले गए।

एनआईए व ईडी ने मिलकर ध्वस्त की माओवादियों की अर्थव्यवस्था
राष्ट्रीय जांच एजेंसी व ईडी ने मिलकर माओवादियों के अर्थव्यवस्था को ही ध्वस्त कर दिया। माओवादियों को कंगाल बना दिया। इसका असर यह हुआ कि न तो वे अपने कैडर को बहाल कर सके, उन्हें बढ़ा सके और न हीं हथियार, गोलाबारूद खरीद सके।

दो दिन पहले ईडी ने कुख्यात माओवादी रीजनल कमांडर 20 लाख के इनामी रवींद्र गंझू व उसके सहयोगियों की 3.87 करोड़ रुपये मूल्य की 11 अचल संपत्तियों को जब्त की है।

इससे पूर्व टेरर फंडिंग व मनी लांड्रिंग मामले में प्रतिबंधित माओवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया के विरुद्ध जांच कर रही ईडी ने पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप जांच में पाया था कि दिनेश गोप ने लेवीरंगदारी से 20 करोड़ रुपये अर्जित की थी।

जांच में करीब 3.36 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग की जानकारी सामने आई थी। दिनेश गोप की करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त हो चुकी है।

इन माओवादियों के विरुद्ध आर्थिक चोट पहुंचा चुकी है एजेंसियां

  • ईडी ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के माओवादी विनोद कुमार गंझू, प्रदीप राम व इनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हजारीबाग में बनाई गई कुल 2.89 करोड़ रुपये की चलअचल संपत्ति जब्त की थी। इसमें नकदी, वाहन, मकान आदि शामिल थे।
  • अब तक रवींद्र गंझू सहित भाकपा माओवादी संगठन के 13 सदस्यों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इनमें दो रीजनल कमांडर, एक जोनल कमांडर, पांच सब जोनल कमांडर, एक एरिया कमांडर व पांच सदस्य शामिल हैं। इनकी 73 लाख 62 हजार 800 रुपये मूल्य की 83.53 एकड़ भूमि, 1.96 करोड़ रुपये के आठ भवन व 56.71 लाख रुपये मूल्य के 473.9 ग्राम सोना जब्त हो चुके हैं।
  • पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप सहित पांच माओवादियों की करोड़ों की चलअचल संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है। इनमें एक जोनल कमांडर, दो सब जोनल कमांडर व एक सदस्य शामिल है।
  • माओवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के 16 माओवादियों की संपत्ति को भी एजेंसियों ने जब्त की है। इनमें चार रिजनल कमांडर, एक सब जोनल कमांडर, तीन जोनल कमांडर, एक एरिया कमांडर व सात सदस्यों की संपत्ति शामिल हैं। इनकी 123 एकड़ भूमि, आठ बिल्डिंग, जिसकी कीमत चार करोड़ 19 लाख 354 रुपये है, 26 वाहन व 41 लाख 14 हजार रुपये जब्त हो चुके हैं।

 

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