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आईएफएफएम 2026 में दिखेगा तमिल सिनेमा का दम, ‘मेंबर्स ऑफ द प्रॉब्लेमैटिक फैमिली’ बनी ओपनिंग नाइट फिल्म

मुंबई : तमिल सिनेमा लगातार अपनी दमदार कहानियों और अलग तरह के विषयों के दम पर दुनिया भर में पहचान बना रहा है। अब इसी कड़ी में निर्देशक आर. गौतम की पहली फीचर फिल्म ‘मेंबर्स ऑफ द प्रॉब्लेमैटिक फैमिली’ ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इस फिल्म को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 की ओपनिंग नाइट फिल्म चुना गया है।

आईएफएफएम 2026 में दिखेगा तमिल सिनेमा का दम, ‘मेंबर्स ऑफ द प्रॉब्लेमैटिक फैमिली’ बनी ओपनिंग नाइट फिल्म

फिल्म के निर्देशक आर. गौतम ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ‘मेंबर्स ऑफ द प्रॉब्लेमैटिक फैमिली’ उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने कहा, ”यह केवल एक पारिवारिक कहानी नहीं, बल्कि दुख, रिश्तों और समाज के भीतर छिपी उन जटिल भावनाओं की कहानी है, जिनसे लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में गुजरता है। बर्लिनाले में फिल्म के प्रीमियर के बाद अब इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की ओपनिंग नाइट फिल्म बनना मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं है।”

आर. गौतम ने आगे कहा, ”इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक बन चुका है। ऐसे मंच पर अपनी फिल्म को दुनिया भर के दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना किसी भी फिल्मकार के लिए गर्व की बात होती है। मैं अपनी पूरी टीम और कलाकारों के साथ ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों से मिलने और उनकी प्रतिक्रियाएं जानने के लिए बेहद उत्साहित हूं।”

फिल्म के निर्देशक आर. गौतम और मुख्य अभिनेता करुथ्थादयन फिल्म की ऑस्ट्रेलियाई प्रीमियर स्क्रीनिंग और ओपनिंग नाइट समारोह में शामिल होंगे। इस साल आईएफएफएम का आयोजन 13 अगस्त से 23 अगस्त तक किया जाएगा, जबकि फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग 14 अगस्त को मेलबर्न में होगी। इस दौरान दुनिया भर से फिल्मकार, कलाकार और सिनेमा प्रेमी इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव का हिस्सा बनेंगे।

बता दें कि ‘मेंबर्स ऑफ द प्रॉब्लेमैटिक फैमिली’ को इस साल आईएफएफएम अवॉर्ड्स की जूरी प्रतियोगिता में बेस्ट इंडी फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर जैसी कैटेगिरी में भी नोमिनेशन मिला है।

फिल्म की कहानी प्रभा नाम के एक युवा के इर्दगिर्द घूमती है, जिसकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो जाती है। उसकी मौत से सिर्फ उसका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरी कम्युनिटी गहरे सदमे में आ जाती है। इसके बाद अंतिम संस्कार से जुड़े 16 दिनों के शोक अनुष्ठान के दौरान परिवार के सभी सदस्य एक जगह इकट्ठा होते हैं। इस दौरान वर्षों से दबे हुए रिश्तों की कड़वाहट, अनकहे दर्द, पारिवारिक मतभेद और भावनात्मक संघर्ष धीरेधीरे सामने आने लगते हैं। फिल्म इसी सफर के जरिए इंसानी रिश्तों की गहराई और परिवार के भीतर छिपी सच्चाइयों को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है।

 

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