जालंधर : पंजाब से राज्यसभा सांसद और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद वापस ली गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा को बहाल करने की भज्जी की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिकॉर्ड देखने के बाद ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि पार्टी छोड़ने की वजह से अचानक उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है। इस फैसले ने सुरक्षा बहाल होने की उनकी सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

आप छोड़ने का सुरक्षा छिनने से क्या है कनेक्शन?
हरभजन सिंह ने हाईकोर्ट में अपनी याचिका दाखिल करते हुए तर्क दिया था कि आम आदमी पार्टी का हिस्सा रहने के दौरान उनके पास करीब 25 पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा था। सांसद के मुताबिक, उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को पार्टी से इस्तीफा दिया था और ठीक अगले ही दिन यानी 25 अप्रैल को पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा अचानक हटा ली। हरभजन का आरोप था कि यह फैसला बिना किसी समीक्षा और बिना उनका पक्ष सुने लिया गया। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उनके जालंधर स्थित आवास के बाहर भारी प्रदर्शन हुआ था और उन्हें ‘गद्दार’ बताने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।
पंजाब सरकार ने अदालत में पेश की ये दलील
इस पूरे मामले पर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। राज्य सरकार ने बताया कि हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने का फैसला उनके आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद नहीं लिया गया था। दरअसल, यह निर्णय बहुत पहले 3 मार्च 2026 को ही सुरक्षा समीक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में हुए मूल्यांकन के आधार पर ले लिया गया था। समिति को किसी भी खुफिया एजेंसी से सांसद की जान को खतरे का कोई इनपुट नहीं मिला था। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि भज्जी की पंजाब में गतिविधियां बेहद सीमित हैं और वे ज्यादातर समय राज्य से बाहर ही रहते हैं। हालांकि, जब भी वे पंजाब आएंगे, तो जालंधर पुलिस द्वारा उन्हें स्थानीय स्तर पर जरूरी सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी।
‘गद्दार’ लिखे जाने पर हाईकोर्ट की दो टूक टिप्पणी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हरभजन सिंह की चिंताओं पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल घर के बाहर प्रदर्शन होने या पोस्टरों पर ‘गद्दार’ लिख दिए जाने से जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कोई वास्तविक खतरा साबित नहीं होता है, खासकर तब जब प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा न हुई हो। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 4 मई 2026 को ही हरभजन सिंह को सीआरपीएफ के जरिए वाईप्लस श्रेणी की कड़ी सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। केंद्र की सुरक्षा और पंजाब सरकार के स्थानीय सुरक्षा देने के पक्के आश्वासन को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने भज्जी की याचिका का निपटारा कर दिया।


