जब भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले दिल्ली, मुंबई का ख्याल आने लगता है. लेकिन आज हवा की क्वालिटी बताने वाले ग्लोबल डेटा ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. दुनिया भर के शहरों के प्रदूषण का स्तर बताने वाले डेटा में ऐसा उलटफेर हुआ है जिसने सबको चौंका दिया है. प्रदूषण के मामले में दुनिया के टॉप50 शहरों की लिस्ट से भारत पूरी तरह बाहर हो चुका है और इसकी जगह ली है दुनिया के दो सबसे साफ और विकसित माने जाने वाले देशों ने. जी हां, सुनने में भले ही यह चौंकाने वाला लगे, लेकिन यह सच है. अमेरिका और कनाडा इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं.

AQI डॉट इन की शुक्रवार, 17 जुलाई को दोपहर 1:46 बजे की लाइव रैकिंग के मुताबिक, कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग के धुएं ने पूरे उत्तरी अमेरिका को अपनी चपेट में ले लिया है. कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 350 से ऊपर जा चुका है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है.
क्यों हुआ ऐसा?
इस प्रदूषण की वजह कोई गाड़ियां या फैक्ट्रियां नहीं, बल्कि जंगलों में लगी भीषण आग है.
850 से ज्यादा जगहों पर आग
कनाडा के जंगलों में इस समय 850 से ज्यादा जगहों पर आग धधक रही है. इनमें से 100 से ज्यादा आग पूरी तरह काबू से बाहर हैं.
PM2.5 का कहर
इस आग से भारी मात्रा में PM2.5 यानी हवा में मौजूद बारीक धूल और धुएं के कण निकल रहा है. ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों और खून में पहुंच जाते हैं.
मौसम ने बिगाड़ा खेल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भारी गर्मी और हाईप्रेशर सिस्टम के कारण यह धुआं ऊपर आसमान में फैलने के बजाय जमीन के करीब ही जमा हो गया है.
रिकॉर्ड तोड़ प्रदूषण
अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में AQI का स्तर 700 के पार चला गया, वहीं मिशिगन के कुछ हिस्सों में यह 1,000 को भी पार कर गया. इतने खतरनाक स्तर दुनिया में बहुत कम ही देखने को मिलते हैं.
इन बड़े शहरों में मंडराया खतरा
कनाडा के ओंटारियो के वाटरलू, लंदन और ब्रैंटफोर्ड जैसे शहर इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. इसके साथ ही अमेरिका के फेमस सिटी जैसे न्यू यॉर्क, शिकागो और वॉशिंगटन डीसी भी धुंध की चादर में लिपटे हुए हैं. प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर ही रहने की सख्त सलाह दी है.
कब तक मिलेगी इस प्रदूषण से राहत?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक हवा का रुख नहीं बदलता है का कहना है कि जब तक हवा का रुख नहीं बदलता या भारी बारिश नहीं होती, तब तक इस जहरीली हवा से पूरी राहत मिलना मुश्किल है. एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम लगातार गर्म और सूखा होता जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और ज्यादा बढ़ सकती हैं.



