
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई 2026 ऐतिहासिक दिन बन गया। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। 3D-प्रिंटेड स्वदेशी इंजन और ऑल-कार्बन कंपोजिट तकनीक से लैस यह रॉकेट कई तकनीकी पेलोड्स को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित करने के मिशन पर रवाना हुआ।
तीसरा चरण ‘Kalam-100’ सफलतापूर्वक हुआ सक्रिय
मिशन के तय प्रोफाइल के अनुसार विक्रम-1 का तीसरा चरण Kalam-100 सफलतापूर्वक सक्रिय हो गया। यह रॉकेट का सबसे छोटा लेकिन सबसे अधिक ऊंचाई पर काम करने वाला सॉलिड स्टेज है। इसके फायर होने के साथ ही रॉकेट को निर्धारित कक्षा तक पहुंचने के लिए आवश्यक अंतिम बड़ा थ्रस्ट मिला।
दूसरा चरण ‘Kalam-250’ भी सफलतापूर्वक हुआ अलग
विक्रम-1 ने उड़ान के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। रॉकेट का दूसरा चरण Kalam-250 अपना कार्य पूरा करने के बाद मुख्य रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया।
इस स्टेज का मुख्य उद्देश्य रॉकेट को अंतरिक्ष की ओर आवश्यक गति और ऊंचाई प्रदान करना था, जिसे उसने पूरी सटीकता के साथ पूरा किया। इसके अलग होने के बाद मिशन अगले चरण में प्रवेश कर गया।
पहला चरण भी सफलतापूर्वक हुआ अलग
लॉन्च के कुछ ही समय बाद विक्रम-1 ने ध्वनि की गति से लगभग पांच गुना अधिक रफ्तार हासिल कर ली। इसके बाद रॉकेट का पहला चरण सफलतापूर्वक अलग हो गया।
रॉकेट विज्ञान में स्टेज सेपरेशन सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। पहले चरण का सफलतापूर्वक अलग होना इस बात का संकेत है कि शुरुआती बूस्टर ने अपना कार्य पूरी तरह सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
3D-प्रिंटेड इंजन के साथ अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ विक्रम-1
दोपहर 12:05 बजे विक्रम-1 के शक्तिशाली 3D-प्रिंटेड इंजनों ने आग उगली और रॉकेट तेजी से आसमान की ओर बढ़ गया। इसके साथ ही भारत की धरती से पहली बार किसी निजी कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।
लॉन्च के बाद मिशन कंट्रोल सेंटर में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला।
लॉन्च से पहले थोड़ी देर के लिए रोका गया मिशन
लॉन्चिंग से कुछ मिनट पहले तकनीकी जांच के लिए लॉन्च सीक्वेंस को अस्थायी रूप से इंटरनल होल्ड पर रखा गया था। सभी सिस्टम की जांच पूरी होने के बाद काउंटडाउन दोबारा शुरू किया गया और निर्धारित समय पर रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया।
उड़ान के दौरान ध्वनि से पांच गुना अधिक रफ्तार
मिशन प्रोफाइल के अनुसार लॉन्च के लगभग 25 सेकंड बाद विक्रम-1 ने ध्वनि की गति पार कर ली। करीब डेढ़ मिनट में इसकी रफ्तार ध्वनि से पांच गुना अधिक हो गई, जिसके बाद पहला स्टेज सफलतापूर्वक अलग हुआ।
ऑटोमैटिक लॉन्च सीक्वेंस ने संभाली कमान
लॉन्च से कुछ मिनट पहले ऑटोमैटिक लॉन्च सीक्वेंस सक्रिय कर दिया गया था। इसके बाद उड़ान से जुड़ी सभी अंतिम जांचें कंप्यूटर सिस्टम ने स्वतः पूरी कीं और मिशन पूरी तरह स्वचालित मोड में संचालित हुआ।
ISRO और स्काईरूट की टीम रही पूरी तरह सतर्क
इस ऐतिहासिक मिशन की निगरानी के लिए ISRO के मिशन कंट्रोल रूम में विशेष तैयारियां की गई थीं। वहीं, हैदराबाद स्थित स्काईरूट के एडवांस मिशन कंट्रोल सेंटर से भी वैज्ञानिक लगातार रॉकेट की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।
ऑल-कार्बन कंपोजिट से बना है विक्रम-1
विक्रम-1 भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है जिसे पूरी तरह ऑल-कार्बन कंपोजिट से तैयार किया गया है। यह सामग्री स्टील की तुलना में काफी हल्की होने के साथ बेहद मजबूत भी है, जिससे रॉकेट की कार्यक्षमता और पेलोड क्षमता बेहतर होती है।
अंतरिक्ष में भेजे गए खास पेलोड
इस मिशन में कई अनोखे पेलोड भी शामिल किए गए हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्’ पोस्टकार्ड।
- डॉ. विक्रम साराभाई, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और सर सी.वी. रमन की सूक्ष्म प्रतिमाओं वाला स्वर्ण रॉकेट।
- Cosmic Bloom नाम का लैब-ग्रोन डायमंड।
- EMBRACE मिशन के तहत भविष्य में अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) साफ करने वाली रोबोटिक आर्म तकनीक।
क्या है विक्रम-1 की खासियत?
- 350 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता।
- 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुंचने में सक्षम।
- पूरी तरह स्वदेशी 3D-प्रिंटेड इंजन।
- ऑल-कार्बन कंपोजिट संरचना।
- चार चरणों वाला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल।
ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों ने बनाई कंपनी
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। इससे पहले कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल परीक्षण किया था। अब विक्रम-1 के साथ कंपनी ने भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं
मिशन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मिशन भारत के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है तथा देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए युग की शुरुआत करेगा।



