BiharIndia

पीली, नीली और हरी… अलग-अलग रंग की गोभी उगा पूर्णिया के किसान ने चौंकाया, फायदे जान हैरान रह जाएंगे!

पीली, नीली और हरी... अलग-अलग रंग की गोभी उगा पूर्णिया के किसान ने चौंकाया, फायदे जान हैरान रह जाएंगे!

रंगीन गोभी की खेती

क्या आपने कभी पीली, नीली और हरी गोभी देखी हैं? अगर नहीं तो बिहार के पूर्णिया जिले में आकर प्रगतिशील किसान शशिभूषण के खेतों में लगी गोभी को देख सकते हैं. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से किसान आ रहे हैं और नए तरह की खेती का तरीका सीख कर जा रहे हैं. पूर्णिया पूर्व ब्लॉक के रानीपतरा के रहने वाले प्रगतिशील किसान शशिभूषण सिंह जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए मिश्रित खेती कर रहे हैं.

शशिभूषण के खेत मे अलग-अलग रंगों के फूल गोभी और पत्ता गोभी की पैदावार हो रही है. एक तरफ जहां बाजारों में केमिकल युक्त सब्जियां मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने घरों में ही जैविक खाद तैयार कर वे सब्जी का उत्पादन कर रहे हैं. अभी वर्तमान में उनके 8 बीघा खेत में अलग अलग रंगों के गोभी, पत्ता गोभी, शलगम आदि लगे हुए है, जिससे उन्हें लाखों की आमदनी भी हो रही हैं.

Colored Cabbage

जानें क्यों खास है रंगीन गोभी

उनकी खेती की चर्चा देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है. विदेशों से वैज्ञानिक भी शशिभूषण की उपजाई जा रही सब्जियों को देखने आ रहे हैं. इसके अलावा आसपास के जिलों से किसान भी ट्रेनिंग के लिए खेतों में पहुंच रहे हैं. शशिभूषण की ख्याति को सुनकर बिहार के राज्यपाल तक उनके खेतों में आ चुके हैं. शशिभूषण सिंह बताते हैं कि उनके द्वारा उपजाई जा रही रंगीन गोभी में विटामिन ए, बी,सी और के प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं.

Organic Farming

शशिभूषण अब तक जीत चुके 16 पुरस्कार

खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह काफी फायदेमंद है. बिहार में लगने वाले कृषि प्रदर्शनी में शशिभूषण सिंह अपना स्टॉल जरूर लगाते हैं. 25 सालों से खेती कर रहे शशिभूषण सिंह अब तक 16 पुरस्कार जीत चुके हैं. अपनी उत्कृष्ट खेती के लिए उन्हें कई बार ‘सर्वश्रेष्ठ किसान’ का पुरस्कार और अन्य सम्मान मिले हैं. शशि भूषण सिंह पारंपरिक खेती से हटकर नई तकनीकों और सब्जियों को अपनाकर रानीपतरा के किसानों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं.

अन्य किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा

वे रेडियो पर किसानों को नई नई तकनीक की खेती की जानकारी भी देते हैं. इसके अलावे वे नई प्रजाति का बीज का भी इजात करते रहते हैं. उन्होंने काला सेम के बीज की भी खोज की है, जिसे उन्होंने पेटेंट करवाया है. वे कई किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं. अन्य किसानों को भी चाहिए कि केमिकल युक्त खेती को छोड़कर जैविक खेती को बढ़ावा दे. साथ ही शशिभूषण के तरह नए किस्म के फसलों का उत्पादन करें और अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करें.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply