
क्या आप जानते हैं कि धरती पर एक ऐसा आइलैंड भी है, जहां पर गधे पजामा पहनकर घूमते हैं? यकीन मानिए, शायद नहीं जानते होंगे. लेकिन आज हम आपको उस आइलैंड के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सड़क से लेकर पार्क तक में गधे चेकदार पैंट पहनकर घूमते दिख जाएंगे.
पेरिस. दुनियाभर में जानवरों की अनोखी आदतों और इंसानों द्वारा उनके लिए बनाए गए अनूठे रिवाजों की कोई कमी नहीं है. लेकिन क्या आप कभी सोच सकते हैं कि किसी जगह पर गधे बाकायदा इंसान जैसी पैंट या पजामा पहनकर घूमते हों? आज हम आपको धरती की ऐसी ही अनोखी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं. फ्रांस के पश्चिमी तट पर ला रोशेल के पास स्थित इल-दे-रे नाम का एक बेहद खूबसूरत आइलैंड मौजूद है. यह टापू अपने रेतीले समुद्र तटों, शांत माहौल और ठंडी हवाओं के लिए पर्यटकों के बीच बेहद मशहूर है. लेकिन इस टापू की सबसे अनोखी पहचान यहां रहने वाले गधे हैं, जो किसी आम जानवर की तरह नहीं, बल्कि रंग-बिरंगी और चेकदार पैंट पहनकर सड़कों व पार्कों में घूमते हुए दिखाई देते हैं. इन गधों को एन्स एन कुलोट यानी पैंट पहने हुए गधे कहा जाता है.
ये कोई आम गधे नहीं हैं, बल्कि यह गधों की सबसे बड़ी और दुर्लभ प्रजातियों में से एक पॉइटौ नस्ल के गधे हैं. फ्रांस के पॉइटौ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले इन गधों की सबसे बड़ी खासियत इनका भारी-भरकम शरीर और उस पर लटकते हुए लंबे, उलझे और घने बाल होते हैं, जिन्हें कादानेत कहा जाता है. अपनी ताकत और लंबे कद-काठी के कारण प्राचीन समय में इन गधों का इस्तेमाल इल-दे-रे टापू के नमक के मैदानों और खेतों में बोझा ढोने और काम करने के लिए किया जाता था. अब सवाल यह उठता है कि इन गधों को पैंट पहनाने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, जब ये गधे नमक के दलदली मैदानों और खेतों में काम करते थे, तो दलदल में पनपने वाले जहरीले मच्छर और कीड़े-मकोड़े इनकी टांगों पर काटकर इन्हें बहुत परेशान करते थे. कीड़ों के काटने से गधों के पैरों में गंभीर इन्फेक्शन हो जाता था.
इस समस्या का अनोखा हल निकालते हुए इनके मालिकों ने पुराने पर्दे वाले कपड़ों या गद्दों के कवर वाले धारीदार कपड़ों से गधों की चारों टांगों के लिए पजामा सिलना शुरू कर दिया. काम पर जाने से पहले रोज सुबह गधों को यह पैंट पहना दी जाती थी, जिससे कीड़े उनके पैरों तक न पहुंच सकें. आजकल मशीनीकरण के कारण नमक के मैदानों में इन गधों से काम लेना बंद कर दिया गया है. लेकिन, इसके बावजूद यह परंपरा आज भी पूरी तरह से जिंदा है और काम कर रही है! हालांकि, अब इसका उद्देश्य बदल चुका है. अब गधों को खेती के लिए नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखने और टापू पर आने वाले पर्यटकों व बच्चों को आकर्षित करने के लिए पैंट पहनाई जाती है.
टापू के सेंट-मार्टिन-दे-रे स्थित बारबेट पार्क में पर्यटक अप्रैल से अक्टूबर के महीनों में आज भी इन पैंट पहने गधों को देख सकते हैं, उनके साथ तस्वीरें खिंचवा सकते हैं और उनकी सवारी का लुत्फ उठा सकते हैं. एक दौर था जब पॉइटौ नस्ल के खच्चरों की पूरी दुनिया में भारी मांग थी और इन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन कामकाजी खच्चर माना जाता था. मध्य 20वीं सदी तक हर साल 30,000 से ज्यादा खच्चरों को दुनिया भर में निर्यात किया जाता था. लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मशीनों के आने से इनकी मांग खत्म हो गई और 1977 तक दुनिया में सिर्फ 44 शुद्ध पॉइटौ गधे ही बचे थे. हालांकि, संरक्षण प्रयासों के चलते इनकी आबादी में सुधार हुआ है और आज दुनिया भर में हजारों पॉइटौ गधे मौजूद हैं, जो अपनी इस अनूठी पैंट वाली पहचान से इल-दे-रे टापू की शान बढ़ा रहे हैं.



