नई दिल्ली
शक्कर हर घर की हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। हर दिन हम किसी ना किसी रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों की सूची में शामिल है, लेकिन इस बार देश में चीनी की कमी को लेकर चर्चा तेज है। घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमत को सामान्य रखने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया। इसके बाद देश में चीनी की आपूर्ति और उपल्बधता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे।

अब ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन ने चीनी की कमी की खबरों को निराधार बताया है, और उसने अपने सदस्यों से पूरे देश में चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनकी ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब कारखाने से चीनी की कीमतों में एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उद्योग संगठनों ने अफवाहों से बचने की अपील की
रिपोर्ट के मुताबिक, Indian Sugar & Bioenergy Manufacturers Association और National Federation of Cooperative Sugar Factories Ltd ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू खपत को पूरा करने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी।
दोनों संगठनों ने कहा कि हाल में कीमतों में आई तेजी मांग और सप्लाई की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है. बाजार में कमी का माहौल बनाना, सट्टेबाजी करना या गलत जानकारी फैलाना उपभोक्ताओं और चीनी पर निर्भर उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. संगठनों ने व्यापारियों और अन्य हितधारकों से अनावश्यक स्टॉक जमा करने और अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है।
जल्द शुरू होंगी चीनी मिलें
अपने सदस्यों को भेजे गए एक पत्र में, AISTA ने पिछले हफ्ते जारी भारतीय चीनी और जैवऊर्जा निर्माता संघ और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी मिल मालिकों ने कृषिजलवायु परिस्थितियों के आधार पर 202627 सीजन को जल्द से जल्द शुरू करने पर सहमति जताई है।
चीनी की उपलब्धता को लेकर ठोस कदम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी ने कहा, “हाल ही में कारखाने से एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने चीनी की कमी की एक निराधार धारणा पैदा कर दी है।”
उन्होंने चीनी मूल्य श्रृंखला के सभी शेयरहोल्डर्स मिलों, व्यापारिक घरानों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और संस्थागत उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए “सकारात्मक कदम” उठाएं कि चीनी पूरे देश में आसानी से उपलब्ध रहे।
जल्दबाजी में ना करें पैनिक खरीदी
मीडिया खबरों के मुताबिक AISTA अध्यक्ष ने कोविड19 महामारी के दौरान आपूर्ति बनाए रखने का उदाहरण देते हुए सदस्यों से अभी भी वैसा ही अप्रोच दिखाने का आग्रह किया और सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने तथा इसे बाधित करने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी।
उन्होंने सदस्यों से घबराहट में खरीदारी या सट्टेबाजी के लिए स्टोर करने से बचने, सरकारी नियमों का पालन करने और भ्रामक सूचनाओं या अफवाहों को नजरअंदाज करने का भी आग्रह किया।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम स्टॉक का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखने को मिली है. ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं, लेकिन यहां अन्य राज्यों की तुलना में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम बचा है।
चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्टॉक कम होने के कारण अब अन्य राज्यों की चीनी मिलों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है. बाजार में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता ने भी कीमतों में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाई है।
उत्पादन में सुधार की उम्मीद
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले 202526 Sugar Year में देश का चीनी उत्पादन करीब 27.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले सीजन के 25.6 मिलियन टन की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से आने वाले महीनों में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
एक्सपोर्ट बैन के बाद बदला बाजार
सरकार ने मई 2026 में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने के बाद Sugar Export पर रोक लगा दी थी. एक्सपोर्ट बैन लागू होने से पहले करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था. इसमें सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलों का रहा।
बताया जा रहा है कि इन राज्यों की कई मिलों ने अपने हिस्से के साथसाथ उत्तर प्रदेश को आवंटित कुछ Export Quota का भी इस्तेमाल किया था. इसके बदले उत्तर प्रदेश की मिलों को घरेलू बिक्री के लिए अतिरिक्त कोटा दिया गया।
कितने बढ़े शक्कर के दाम?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में औसत खुदरा चीनी की कीमत एक महीने पहले के ₹47.01 प्रति किलो, तीन महीने पहले के ₹46.48/किलो और छह महीने पहले के ₹46.34/किलो से बढ़कर 17 जुलाई को ₹47.9/किलो हो गई है। थोक बाजार में, पिछले छह महीनों में कीमतें बढ़कर ₹4,294.70/किलो से 17 जुलाई तक ₹4,447.57/क्विंटल हो गई हैं।



