
घर में रखा सोना बन गया ‘खजाना’
साल 2025 भारतीय परिवारों के लिए आर्थिक रूप से एक मिला-जुला साल साबित हुआ है. एक तरफ जहां शेयर बाजार में निवेशकों को मायूसी हाथ लगी, वहीं दूसरी तरफ घर में रखे सोने ने चुपचाप संपत्ति में भारी इजाफा कर दिया. HDFC म्यूचुअल फंड ईयरबुक 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 2025 में सोने की कीमतों में आई तेजी की वजह से भारतीय घरों की संपत्ति में 117 लाख करोड़ रुपये (1.3 ट्रिलियन डॉलर) की बढ़ोतरी हुई है. यह आंकड़ा पिछले 25 सालों में सोने से हुई सबसे बड़ी कमाई है. इस भारी-भरकम मुनाफे ने आम आदमी को खर्च करने के लिए एक बड़ा ‘बफर’ दिया है. रिपोर्ट बताती है कि सोने के बदले लोन (Gold Loans) लेने के मामलों में भी तेजी आई है.
सोना बना ‘सुपरहीरो’, शेयर बाजार रहा सुस्त
बीते साल यानी 2025 में सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम लगभग 57,000 रुपये का उछाल आया. इससे पहले 2024 में भी सोना 14,000 रुपये महंगा हुआ था. इन दो सालों की तेजी ने भारतीय परिवारों की बैलेंस शीट को मजबूत कर दिया है. इसके ठीक उलट, शेयर बाजार का प्रदर्शन फीका रहा. निफ्टी 50 (NIFTY 50) ने अपने वैश्विक साथियों और उभरते बाजारों की तुलना में लगभग 25% कम रिटर्न दिया. यह पिछले तीन दशकों में भारतीय बाजार का सबसे खराब सापेक्ष प्रदर्शन (relative performance) था. रिपोर्ट में इसे ‘कंसोलिडेशन’ या ठहराव का दौर कहा गया है. जहां सोना, यूरोप और अमेरिकी बाजार चमके, वहीं तेल, डॉलर और बिटकॉइन का प्रदर्शन 2025 में सबसे खराब रहा.
छोटे शेयरों में फंसा पैसा
पिछले कुछ वर्षों में स्मॉल और मिड-कैप शेयरों ने खूब दौड़ लगाई थी लेकिन 2025 में बाजी पलट गई. लार्ज-कैप शेयरों ने इस बार बाजी मारी. चिंता की बात यह है कि करीब 30% स्मॉल-कैप शेयर अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर से 30% या उससे ज्यादा टूट चुके हैं. ऐसे में HDFC म्यूचुअल फंड ने नए निवेशकों को सलाह दी है कि वे सीधे शेयरों में पैसा लगाने के बजाय ‘हाइब्रिड फंड्स’ (Hybrid Funds) का रास्ता चुनें. इससे इक्विटी, डेट और गोल्ड तीनों एसेट क्लास का फायदा मिलता है और जोखिम भी कम रहता है.
लंबी रेस का घोड़ा बनने में ही फायदा
शेयर बाजार में नुकसान के डर को लेकर रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प आंकड़ा पेश किया गया है. अगर आप सेंसेक्स में पैसा लगाते हैं और उसे 15 साल तक नहीं निकालते, तो नुकसान की संभावना 0% हो जाती है. यानी, “लंबी अवधि के बारे में सोचें” (Think Long-Term) का फॉर्मूला ही सबसे कारगर है. वहीं, अगर नजरिया सिर्फ एक साल का हो, तो आंकड़ों के मुताबिक नुकसान की आशंका 26% तक रहती है. 5 साल के निवेश पर यह जोखिम घटकर 7% और 10 साल पर महज 1% रह जाता है. इसलिए, बाजार के मौजूदा उतार-चढ़ाव में घबराने के बजाय अनुशासित निवेश (SIP) पर बने रहना समझदारी है.
2026 में भी सोने से बनेगा तगड़ा पैसा?
वीटी मार्केट्स के रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, 2026 में सोने की कीमतें सट्टेबाजी से नहीं, बल्कि ब्याज दरों और महंगाई जैसे फैक्टर्स से तय होंगी. अगर ब्याज दरें घटती हैं या सरकारी कर्ज बढ़ता है, तो सोने की मांग बढ़ेगी. वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अनिश्चित माहौल में चांदी के मुकाबले सोना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश साबित होगा.




