
शहर की एक साधारण-सी सड़क पर बने कुछ कैफे बाहर से बिल्कुल आम नजर आते थे। लोग वहां चाय-कॉफी पीते, दोस्त मिलते और कपल्स आते-जाते दिखाई देते। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इन बंद दरवाजों और पर्दों के पीछे एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसकी परतें खुलते ही पुलिस भी हैरान रह गई।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के दौरान पुलिस की नजर कुछ संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी। शुरुआत में मामला मामूली लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी कहीं ज्यादा खौफनाक निकलती गई।
पुलिस ने जब एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसका मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाला, तो स्क्रीन पर एक-एक करके सैकड़ों तस्वीरें, चैट और संपर्क सामने आने लगे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, रिकॉर्ड में 100 से ज्यादा युवतियों के संपर्क मिले, जबकि नेटवर्क की कड़ियां तीन अलग-अलग राज्यों तक फैली हुई थीं।
पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। अलग-अलग शहरों से युवतियों को बुलाया जाता और फिर उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती। पूरा संचालन मोबाइल चैट, कॉल और डिजिटल माध्यमों से किया जाता था।
लेकिन सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने शहर के कुछ कैफे की जांच की। बाहर से सामान्य दिखने वाले इन कैफे के अंदर सीक्रेट केबिन बनाए गए थे। इन कमरों को पर्दों से पूरी तरह ढका गया था और कथित तौर पर घंटों के हिसाब से किराए पर दिया जाता था। खाने-पीने की व्यवस्था नाम मात्र की थी, जबकि असली गतिविधियां पर्दों के पीछे चल रही थीं।
जांच के दौरान कई कैफे संचालकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई। प्रशासन ने नगर निगम की टीम के साथ कार्रवाई करते हुए कई संदिग्ध कैफे को सील कर दिया और अन्य स्थानों की जांच शुरू कर दी।
इस बीच जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए, जिनसे विभाग के भीतर भी हलचल मच गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर एक पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई, जबकि संबंधित अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की आर्थिक लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।



