आज के समय में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP निवेश के सबसे पॉपुलर तरीकों में से एक बन गया है. पहले लोग SIP का इस्तेमाल सिर्फ इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए करते थे, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म डेट फंड, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में भी SIP की सुविधा दे रहे हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या बॉन्ड SIP भी इक्विटी SIP की तरह काम करती है? इसका जवाब है नहीं. दोनों का तरीका और फायदा अलगअलग होता है. इसलिए निवेश करने से पहले दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है.

कैसे काम करती है Equity SIP?
इक्विटी SIP का सबसे बड़ा फायदा बाजार के उतारचढ़ाव से मिलता है. शेयर बाजार में कीमतें लगातार ऊपरनीचे होती रहती हैं. जब बाजार गिरता है, तो आपकी तय मंथली SIP से ज्यादा यूनिट्स खरीद ली जाती हैं.वहीं, बाजार चढ़ने पर कम यूनिट्स मिलती हैं. इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है. इससे लंबे समय में आपकी औसत खरीद कीमत कम हो जाती है और निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है. यानी शेयर बाजार की गिरावट भी SIP निवेशकों के लिए एक अवसर बन जाती है.
Bond SIP क्यों अलग होती है?
बॉन्ड में निवेश का तरीका पूरी तरह अलग है. सरकारी या अच्छी रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड की कीमतों में बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव नहीं होता. इनमें आमतौर पर कुछ महीनों में सिर्फ 1% से 3% तक का बदलाव देखने को मिलता है. ऐसे में यहां कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा बहुत कम मिलता है. बॉन्ड में निवेश करते समय आपका रिटर्न ज्यादातर उसी समय तय हो जाता है, जब आप बॉन्ड खरीदते हैं. अगर आप बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो बीच में कीमत ऊपरनीचे होने से आपके तय रिटर्न पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. यही वजह है कि बॉन्ड SIP का मकसद कम कीमत पर ज्यादा यूनिट खरीदना नहीं, बल्कि अलगअलग समय पर अलगअलग ब्याज दरों का फायदा लेना होता है.
Bond SIP का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
मान लीजिए ब्याज दरें कभी बढ़ती हैं और कभी घटती हैं. अगर आप हर महीने बॉन्ड खरीदते हैं, तो हर बार अलग ब्याज दर पर निवेश करते हैं. इससे आपका निवेश एक ही समय की ब्याज दर पर निर्भर नहीं रहता. अगर भविष्य में ब्याज दरें गिर जाती हैं, तो पहले खरीदे गए बॉन्ड फायदा देंगे. वहीं अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बाद में खरीदे गए बॉन्ड ज्यादा रिटर्न देंगे. इस तरह आपको सही समय चुनने की चिंता नहीं करनी पड़ती.
Bond SIP कैसे शुरू करें?
आज कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बॉन्ड SIP की सुविधा देते हैं. आपको पहले यह तय करना होता है कि आप किस तरह के बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं. इसके बाद मासिक निवेश राशि और तारीख चुननी होती है. फिर UPI या eNACH के जरिए ऑटो डेबिट सेट हो जाता है और हर महीने आपके डिमैट अकाउंट में बॉन्ड जुड़ते रहते हैं. बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज सीधे आपके बैंक खाते में जमा होता है.
Bond SIP में निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
1. ज्यादा ब्याज का मतलब ज्यादा जोखिम
अगर कोई बॉन्ड 11% या 12% रिटर्न दे रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह सबसे अच्छा विकल्प है. ज्यादा ब्याज अक्सर ज्यादा जोखिम के साथ आता है. कम रेटिंग वाली कंपनियों के बॉन्ड में डिफॉल्ट का खतरा ज्यादा हो सकता है.
2. समय से पहले निकलना आसान नहीं
बॉन्ड में निवेश करने के बाद अगर आप मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना चाहते हैं, तो हो सकता है आपको सही कीमत न मिले. इसलिए बॉन्ड SIP को लंबी अवधि का निवेश मानकर ही शुरू करें.
3. अलगअलग जगह निवेश
अलगअलग कंपनियों और अलगअलग समय पर बॉन्ड खरीदने से जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता.
कौनसी SIP आपके लिए बेहतर है?
अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न और संपत्ति बनाना है, तो इक्विटी SIP बेहतर विकल्प हो सकती है. वहीं अगर आप स्थिर आय, कम उतारचढ़ाव और निश्चित रिटर्न चाहते हैं, तो Bond SIP आपके लिए बेहतर हो सकती है. निवेश का फैसला हमेशा अपनी आय, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए.



