जब से पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल मिलना शुरू हुआ है, पुरानी कार चलाने वालों की नींद उड़ी हुई है. हर कोई यही पूछ रहा है कि अगर इस नए पेट्रोल से हमारी गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम बैठ गया, तो क्या मोटर इंश्योरेंस कंपनी इसकी मरम्मत का खर्च उठाएगी? सोशल मीडिया पर रोज नईनई डराने वाली बातें शेयर हो रही हैं. किसी ने कहा क्लेम नहीं मिलेगा, तो किसी ने कहा पॉलिसी ही खत्म हो जाएगी. अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो टेंशन छोड़िए. सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों ने सारी तस्वीर साफ कर दी है.

क्या सच में E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो रहे हैं?
व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा मत कीजिए. सरकार ने इसे लेकर एक विस्तृत बयान जारी किया है जिसमें साफ कहा गया है कि ऐसा कोई भी पक्का सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन को खराब कर रहा है. असल में, भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का काम कोई कल का नहीं है, यह साल 2001 से अलगअलग चरणों में चल रहा है. आज की तारीख में सड़कों पर 20 करोड़ से ज्यादा टूव्हीलर और 3 करोड़ से ज्यादा कारें इसी पेट्रोल के भरोसे मजे से दौड़ रही हैं. किसी भी कार बनाने वाली कंपनी की तरफ से सरकार को इंजन सीज होने या टैंक में जंग लगने की कोई शिकायत नहीं मिली है.
क्लेम रिजेक्ट होने का ये डर फैला कहां से?
लोगों के मन में यह घबराहट हवा में नहीं पनपी है. हुआ यूं कि 9 जून को एक बड़ी इंश्योरेंस कंपनी के एक ब्लॉग में यह बात छप गई कि अगर पुरानी गाड़ियों में E20 डाला जाता है, तो इसे गाड़ी मालिक की ‘लापरवाही’ माना जा सकता है. ब्लॉग में इशारा था कि ऐसी स्थिति में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. जैसे ही यह बात इंटरनेट पर फैली, पुरानी कारों के मालिकों में हड़कंप मच गया. मामला इतना तूल पकड़ गया कि खुद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को आगे आकर लोगों को भरोसा दिलाना पड़ा.
इंश्योरेंस कंपनियों ने दी राहत, दूर किया कन्फ्यूजन
बवाल बढ़ते ही संबंधित इंश्योरेंस कंपनी ने फौरन अपनी सफाई पेश की और ग्राहकों को एक बड़ी राहत दी. कंपनी ने एकदम स्पष्ट कर दिया कि गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी बीमा पॉलिसी किसी भी सूरत में अमान्य या रद्द नहीं होती है. सबसे अहम बात यह कही गई कि पुरानी गाड़ियों में इस नए पेट्रोल को भरवाना अब किसी भी नजरिए से ‘लापरवाही’ नहीं माना जाएगा. क्लेम देते समय इंश्योरेंस कंपनियां कभी यह नहीं देखतीं कि गाड़ी में नॉर्मल पेट्रोल था, डीजल था या E20 था. अगर आपकी पॉलिसी सही है, तो फ्यूल की वजह से क्लेम नहीं रोका जाएगा.
क्या इंजन सीज होने पर इंश्योरेंस कवर मिलेगा?
अब इस बात को बहुत ध्यान से समझ लीजिए, क्योंकि सारा खेल यहीं पर है. आपकी कार का बीमा एक्सीडेंट, चोरी, आग लगने या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर आपको कवर देता है. लेकिन, इसमें एक शर्त होती है. अगर आपकी कार का इंजन पुरानी होने की वजह से, चलतेचलते कलपुर्जे घिसने से, या किसी सामान्य मैकेनिकल खराबी के कारण बैठ जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी उसका पैसा नहीं देती.
सीधे शब्दों में कहें तो अगर आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट होता है, तो इंश्योरेंस कंपनी पूरा पैसा देगी, चाहे उसमें E20 पेट्रोल ही क्यों न पड़ा हो. लेकिन अगर इंजन सिर्फ समय के साथ या मशीनरी फेल होने की वजह से खराब हुआ है, तो उसे मोटर बीमा के तहत कवर नहीं किया जाएगा. यानी, आपका क्लेम इस बात पर पास होगा कि नुकसान की असली वजह क्या है, न कि इस बात पर कि गाड़ी में कौन सा पेट्रोल डाला गया था.



