पटियाला.

नाभा के गांव मैहस की 30 वर्षीय हरजिंदर कौर ने ग्लासगो कामनवेल्थ गेम्स में जब कल 227 किलो वजन उठाकर रजत पदक जीता तो उन्होंने देश की उम्मीद को पूरा किया। उन्होंने 69 किलो भार वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की।
हरजिंदर कौर को यह सफलता कुछ ही दिनों की नहीं बल्कि कई सालों के संघर्ष और कड़ी मेहनत के बाद मिली है। हरजिंदर कौर के पिता के परिवार की पृष्ठभूमि खेती बाड़ी से जुड़ी है उसके पिता साहब सिंह गांव मैहस में ही खेती करते और कुछ साल पहले तक हालात ऐसे थे कि उनके दो कमरों के मकान में 6 सदस्य रहते। हरजिंदर कौर ने स्वयं को वेट लिफ्टिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेकर जाने से पहले बचपन में घर में भैंसों के लिए चारा काटने वाली मशीनों पर घंटे पसीना बहाया।
आज चारा काटने वाले हाथों से उन्होंने देश के लिए कामनवेल्थ गेम्स में दूसरी बार मेडल हासिल किया है। इससे पहले हरजिंदर कौर ने साल 2022 में बर्मिंघम कामनवेल्थ गेम्स में भी क्लीन एंड जर्क व स्नैच में कुल 212 किलो वजन उठाकर कांस्य पदक जीता था। हरजिंदर कौर के खेल जीवन की पृष्ठभूमि ऐसी है कि उनके अभ्यास, खेल उपकरणों और पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके परिवार को जमीन तक बेचनी पड़ी। यहां उल्लेखनीय है कि हरजिंदर कौर कबड्डी और रस्साकसी की भी राज्य स्तरीय खिलाड़ी रही हैं।
बहरहाल पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में वेटलिफ्टिंग के कोच परमजीत शर्मा ने रस्साकसी में उनकी प्रतिभा देखकर उन्हें वेटलिफ्टिंग के प्रति फोकस करने का सुझाव दिया। इसके बाद हरजिंदर कौर ने साल 2016 में पंजाबी यूनिवर्सिटी से वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की। अगस्त 2021 में पटियाला में आयोजित वेट लिफ्टिंग के राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा लिया। साल 2021 में कामनवेल्थ वेट लिफ्टिंग सीनियर चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल जीता। हरजिंदर कौर के लिए वेटलिफ्टिंग का सफर आसान नहीं रहा। लड़की होने के चलते वेटलिफ्टिंग के कारण शरीर पर बुरा असर पड़ने की बात कही गई । इससे हतोत्साहित होकर उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ दी थी और घर लौट आईं।
कुछ हफ्ते घर पर रहीं। उसके बाद कोच और घरवालों ने काफी समझाया। इसके बाद फिर से प्रैक्टिस शुरू की। हरजिंदर कौर परिवार में सबसे छोटी हैं। एक बड़ा भाई और बड़ी बहन है। जब उनका जन्म हुआ तो परिवार को काफी निराशा हुई लेकिन जब बीते बर्मिंघम कामनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता तो पिता ने कहा, तुम मेरी बेटी नहीं, बेटा हो । इससे ज्यादा गर्व आज तक कभी महसूस नहीं हुआ। हरजिंदर कौर ने इस ऐतिहासिक मुकाबले में कुल 227 किलोग्राम का भार उठाकर न केवल पदक का रंग बदला, बल्कि अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया।
हरजिंदर कौर ने प्रतियोगिता के दौरान स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों में अद्भुत खेल दिखाया और इस दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्ड भी तोड़े। स्नैच राउंड में बेहतरीन शुरुआत की। अपने प्रयासों के दौरान उन्होंने पहले 99 किलो वजन उठाकर गेम्स रिकार्ड बनाया और फिर अपने अंतिम प्रयास में 101 किलोग्राम भार उठाकर खुद का ही रिकार्ड तोड़ दिया। क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। उन्होंने पहले 120 किलो, फिर 123 किलो और आखिरी प्रयास में सफलतापूर्वक 126 किलोग्राम वजन उठाया।
कुल परिणाम:
स्नैच और क्लीन एंड जर्क को मिलाकर उन्होंने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस श्रेणी का गोल्ड मेडल कनाडा की शार्टलेट सिमोन्यू ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर जीता।



