चंडीगढ़.

नई कार खरीदने के लिए पूरी कीमत चुकाने के बावजूद समय पर डिलीवरी न देने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने इंडस्ट्रियल एरिया स्थित ऑटोपेस नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक का दोषी ठहराया है।
आयोग ने डीलर को ब्याज समेत 3.25 लाख रुपये हर्जाना और मुकदमा खर्च अदा करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सेक्टर30 निवासी प्रीति शर्मा की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। प्रीति ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 15 फरवरी 2026 को ग्रैंड विटारा अल्फा स्मार्ट हाइब्रिड मैनुअल कार बुक करवाई थी। बुकिंग के समय डीलर ने उन्हें 13 दिन में गाड़ी की डिलीवरी का भरोसा दिया था। उन्होंने 11 हजार रुपये की बुकिंग राशि जमा करवा दी और उसके बाद स्टेट बैंक आफ इंडिया से 14.28 लाख का कार लोन करवा लिया। उन्होंने डीलर को गाड़ी की इंश्योरेंस के लिए करीब 45 हजार रुपये भी जमा करवाए। इसके बावजूद उन्हें तय समय पर कार नहीं दी गई।
ऐसे में उन्होंने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर दी। आयोग के अंतरिम आदेश के बाद 27 अप्रैल 2026 को उन्हें गाड़ी की डिलीवरी मिली। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि डीलर ने गाड़ी की इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन और वारंटी के लिए अलगअलग रकम वसूल की। कई चार्जेस को अनिवार्य बताया गया कि जबकि ग्राहक को यह नहीं बताया गया कि यह वैकल्पिक थे। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना। शिकायत ने बताया कि उन्होंने अपनी पुरानी कार डीलर को सौंप दी थी। पुरानी कार की कीमत 90 हजार रुपये लगाई गई।
महिला ने बताई स्वास्थ्य समस्या
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें गाड़ी की सख्त जरूरत थी। वह गर्भवती थी और उनकी सास भी बीमार रहती थी। उन्होंने अपनी पुरानी गाड़ी डीलर को पहले ही सौंप दी थी, फिर भी डीलर ने उनकी मजबूरी नहीं समझी और गाड़ी की डिलीवरी में देरी कर दी। हालांकि डीलर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के पास रकम कम पड़ गई थी, इसलिए गाड़ी की डिलीवरी में देरी हो गई, हालांकि इस बात का कोई भी सबूत सुनवाई के दौरान सामने नहीं आया। ऐसे में आयोग ने डीलर को मानसिक प्रताड़ना व उत्पीड़न के लिए तीन लाख रुपये हर्जाना और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने के निर्देश दिए।



