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Gen Z को रिझाने के लिए ब्रांड्स ने बदला अपना पैंतरा! इंस्टाग्राम पर लगाया दांव, तैयार की नई ‘मार्केटिंग स्ट्रैटिजी’

हाल की घटनाओं के बाद, देश और दुनिया के तमाम बड़े ब्रांड्स GenZ सेगमेंट पर और ज्यादा फोकस करने की तैयारी में है. खानेपीने और कपड़ों से जुड़ी कंपनियां सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं. यह नई पहल तब शुरू हुई है, जब भारतीय जनता पार्टी ने युवा भारतीयों को ध्यान में रखकर एक नया वीडियो जारी किया है. ईटी की रिपोर्ट के हवाले से तीन ब्रांड्स के अधिकारियों ने कहा कि वे इस GenZ डेमोग्राफी पर अपना फोकस और बढ़ा रहे हैं. एक अधिकारी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में इंस्टाग्राम पर लोगों की दिलचस्पी में जबरदस्त उछाल आया है, इसलिए हम पिछले महीने की तुलना में इस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और प्रमोशन के लिए कम से कम 25 फीसदी ज्यादा खर्च कर रहे हैं.

Gen Z को रिझाने के लिए ब्रांड्स ने बदला अपना पैंतरा! इंस्टाग्राम पर लगाया दांव, तैयार की नई ‘मार्केटिंग स्ट्रैटिजी’

कंपनियों का इंस्टाग्राम पर फोकस

बुधवार को, फैशन ब्रांड प्रोवोग ने एक्टर फरदीन खान के साथ एक डिजिटल कैंपेन की घोषणा की, जो पूरी तरह से GenZ पर सेंट्रिक है. मंगलवार को लिंक्डइन पर एक पोस्ट में, KFC की मार्केटिंग डायरेक्टर तमीशा सजनानी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि KFC के इंस्टाग्राम पर 1 मिलियन फॉलोअर्स हो गए हैं. उन्होंने GenZ कम्युनिटी का शुक्रिया अदा किया कि वे ‘असलीपन को महत्व देते हैं और KFC को हर दिन और ज्यादा KFC बनाते हैं.

ऐड एजेंसी रेडिफ्यूजन के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गोयल ने कहा कि हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर GenZ सेगमेंट को टारगेट करने वाले ब्रांड प्रमोशन में ‘भारी उछाल’ आया है. उन्होंने कहा कि ब्रांड्स सिर्फ इंस्टाग्राम पर ही नहीं, बल्कि सभी सोशल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. लेकिन विज्ञापन पर ज्यादा खर्च करने से कस्टमर्स का जुड़ाव भी बढ़ना चाहिए और असरदार होने और भीड़ से अलग दिखने के लिए कंटेंट का प्रासंगिक होना जरूरी है.

सेल्स में इजाफा

ब्लू टोकाई कॉफी रोस्टर्स के कोफ़ाउंडर शिवम शाही ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मदद करने के लिए उन्हें इंस्टाग्राम पर GenZ के बीच काफी तारीफ मिली है और जनपथ आउटलेट पर सेल हर हफ्ते 20 फीसदी बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि लेकिन, हम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थक नहीं हैं.

हमने मुश्किल में फंसे छात्रों की मदद सिर्फ इंसानी इंसानियत के नाते की थी. उन्होंने आगे कहा कि हमारी पॉलिसीज आम दिनों में भी जरूरतमंदों की मदद करने पर केंद्रित हैं. हमारे वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए आपको कुछ ऑर्डर करने की जरूरत नहीं है और हमारे पास हर समय फर्स्ट एड की सुविधा रहती है.

उन्होंने कहा ​कि अगर आपको कॉफी पसंद नहीं आती है तो हम उसे फ्री में बदल भी देते हैं और आप एक कॉफी ऑर्डर करके दो कप ले जा सकते हैं. हम ऐसे ही हैं. Gen Z दिखावे के बजाय असलियत को, एकतरफा मैसेजिंग के बजाय बातचीत में शामिल होने को और एक बार के कैंपेन के बजाय लगातार बने रहने को ज्यादा अहमियत देते हैं.

कंपनियों की GenZ पर डीप स्टडी

बेंगलुरु में ‘Eatinn Love Trattoria’ की मालिक और शेफ निहारिका पेरी ने ईटी ने कहा कि वे सिर्फ प्रोडक्ट नहीं खरीदते. वे उन स्टोरीज और वैल्यूज से जुड़ते हैं जिनसे वे सच में जुड़ाव महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि वे अब फ्यूचर के कस्टमर नहीं हैं. वे पहले से ही इस बात पर असर डाल रहे हैं कि परिवार क्या खरीदते हैं, लोग कहां खाते हैं और कौन से ब्रांड काम के या लोकप्रिय बनते हैं. इसीलिए, हम देख रहे हैं कि कंज्यूमर ब्रांड से लेकर बड़े संस्थानों तक, हर सेक्टर उन्हें ज्यादा सोचसमझकर जोड़ने की कोशिश कर रहा है.

हंसा रिसर्च में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और क्वालिटेटिव रिसर्च हेड शक्ति बनर्जी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि ब्रांड्स ने GenZ को सिर्फ एक कस्टमर ग्रुप के तौर पर देखना बंद कर दिया है. उन्होंने आगे कहा कि​ वे उन्हें ऐसे लोगों के तौर पर देखते हैं जो कल्चर को आकार देते हैं. हो सकता है कि उनके पास हमेशा बहुत ज्यादा पैसा न हो, लेकिन वे निश्चित रूप से इस बात पर असर डालते हैं कि क्या ट्रेंड कर रहा है, किस बारे में बात की जानी चाहिए और अक्सर परिवार के बाकी लोग आखिर में क्या खरीदते हैं.

GenZ इन्फ्लुएंसर्स बंद किया ब्रांड कोलैबोरेशन

पिछले हफ्ते जब भारत के प्रमुख शहरों में GenZ के विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तो इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म Qoruz के फाउंडर और CEO प्राणेश भुवनेश्वर ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि यह देखना ‘सचमुच हैरान करने वाला’ था कि कुछ GenZ इन्फ्लुएंसर्स ने सिर्फ स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर ध्यान देने के लिए ब्रांड कोलैबोरेशन करना बंद कर दिया.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था और मेरे लिए यह एक अनोखी बात थी. बड़ी एजेंसियां ब्रांडसेफ स्टैंडर्ड्स बनाए रखती हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद, शायद इन्फ्लुएंसर्स के लिए वैल्यूएशन के पैमाने बदल सकते हैं. हमने देखा कि लाखों फोलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर्स ने एक या दो हफ्ते के लिए ब्रांड कोलैबोरेशन और अपनी कमाई को टाल दिया. यह एक बड़ी बात थी. कुछ एडवरटाइजिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि Gen Z के आसपास कल्चर बनाने के लिए ब्रांड का पैसा खर्च करना कोई खर्च नहीं, बल्कि एक इन्वेस्टमेंट है.

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी GenZ

अराइया होटल्स की मालकिन अमरुदा नायर ने कहा कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी, GenZ ट्रैवलर्स बुटीक हॉस्पिटैलिटी को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सोच यह है कि मुझे डेस्टिनेशन के बारे में मत बताओ, बल्कि मुझे उसमें शामिल होने दो. उन्होंने आगे कहा कि ट्रैवल से बिना किसी बदलाव के लौटना इस जेनरेशन को मंजूर नहीं है, और वे तुरंत बता सकते हैं कि किसी होटल के अनुभव असली हैं या सिर्फ दिखावे के लिए हैं. पेरी ने कहा कि जैसेजैसे ज्यादा ब्रांड्स Gen Z का ध्यान खींचने के लिए होड़ कर रहे हैं, वैसेवैसे सिर्फ उन तक पहुंचने के बजाय उनका भरोसा जीतने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा. आखिरकार, इसी से लंबे समय तक बनी रहने वाली वफादारी बनती है.

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