
नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे माह भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु सावन में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत और विशेष पूजाअर्चना कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
यदि आप भी सावन में शिव पूजा कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि शिवलिंग पर सबसे पहले क्या अर्पित किया जाए, पूजा का सही क्रम क्या है और किन वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाएं?
1. सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें
पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाकर करें। जल तांबे या पीतल के लोटे से धीरेधीरे पतली धार में अर्पित करें और इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
2. पंचामृत से अभिषेक करें
जल के बाद पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दही, घी, शहद और चीनी से तैयार किया जाता है। इसके बाद पुनः शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें।
3. कच्चा दूध चढ़ाएं
यदि पंचामृत उपलब्ध न हो, तो जल के बाद गाय का कच्चा दूध अर्पित करें। दूध चढ़ाने के बाद दोबारा जल या गंगाजल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
4. चंदन का लेप लगाएं
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर सफेद या पीले चंदन का तिलक करें।
5. बेलपत्र और प्रिय पूजन सामग्री अर्पित करें
इसके बाद भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, भांग, मदार के फूल और शमी के पत्ते अर्पित करें।
6. अक्षत और जनेऊ चढ़ाएं
अब बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें और फिर भगवान शिव को जनेऊ समर्पित करें।
7. भोग लगाएं
पान का पत्ता, सुपारी, इलायची, मौसमी फल और मिठाई का भोग अर्पित करें।
8. धूपदीप और आरती करें
अंत में धूपदीप जलाकर कपूर से भगवान शिव की आरती करें। चाहें तो आरती से पहले शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
शिव पूजा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- जल अर्पित करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें।
- जल हमेशा पतली धार में धीरेधीरे चढ़ाएं।
- शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित न करें।
- हल्दी, तुलसी, केतकी का फूल और सिंदूर शिव पूजा में अर्पित नहीं किए जाते।
- कटाफटा या धारीदार बेलपत्र न चढ़ाएं।
- बेलपत्र को उल्टा अर्पित करें ताकि उसका चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे।
सावन में व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे सावन माह उपवास रखते हैं और नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप तथा जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और विधिविधान से की गई आराधना से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं में पूजाविधि में भिन्नता हो सकती है। श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार पूजा करें।
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