CBI FIR On Anil Ambani Reliance Capital Case: रिलायंस कैपिटल और उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के 1,816.22 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले के मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई का आरोप है कि आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों के जरिए ईपीएफओ को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।

एजेंसी के मुताबिक, 2013 और 2014 में रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी सिक्योर्ड नॉनकन्वर्टिबल डिबेंचर्स में ईपीएफओ ने चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के माध्यम से 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। बाद में कथित तौर पर निवेश राशि का दुरुपयोग और डायवर्जन किया गया, जिसके कारण एनसीडी का भुगतान नहीं हो सका। सीबीआई का कहना है कि इस मामले में 1,007.55 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान और 808.67 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी सामने आई है। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और निवेश राशि के उपयोग, कथित साजिश तथा इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
EPFO की शिकायत पर CBI ने दर्ज की FIR
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने यह मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। एफआईआर में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन , अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंसी अब दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
2,500 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है मामला
सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2013 और 2014 में रिलायंस कैपिटल ने सिक्योर्ड नॉनकन्वर्टिबल डिबेंचर जारी किए थे। इनमें ईपीएफओ ने चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के जरिए कुल 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इन डिबेंचर्स की मेच्योरिटी 2023 और 2024 में होनी थी, लेकिन निर्धारित समय पर निवेश राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसी वजह से ईपीएफओ को भारी वित्तीय नुकसान होने का दावा किया गया है।
1,816 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप
दरअसल इन एनसीडी की परिपक्वता 2023 और 2024 में होनी थी। हालांकि, शिकायत के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी लेनदेन किए और निवेश की गई राशि का दुरुपयोग तथा दूसरी जगह डायवर्ट किया। इसके कारण रिलायंस कैपिटल एनसीडी का भुगतान नहीं कर सकी, जिससे ईपीएफओ को कुल 1,816.22 करोड़ रुपए का कथित नुकसान हुआ।
निवेश राशि कहां गई, इसकी होगी जांच
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि की निवेश राशि आखिर कहां खर्च की गई और उसका वास्तविक उपयोग क्या हुआ। एजेंसी सभी संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच करेगी।
साथ ही इस कथित साजिश में शामिल सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी विस्तार से खंगाली जाएगी। जांच का मुख्य उद्देश्य धन के प्रवाह और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।
चार्जशीट दाखिल, सात आरोपी गिरफ्तार
जांच एजेंसी ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी वह रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड , रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड , रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों के आधार पर सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है। सीबीआई अब तक रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में चार आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच
सीबीआई ने कहा कि रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि वह निष्पक्ष, तेज और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस नए मामले में भी सभी तथ्यों की विस्तार से जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



