छुई खदान.

शहीद नगरी के नाम से प्रसिद्ध और कभी ‘पान की नगरी’ के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाले छुईखदान की लगभग ढाई सौ वर्ष पुरानी पान परंपरा अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। गौर करें कि एक समय ऐसा भी था जब यहां के पान की खुशबू बनारस सहित देश के अनेक राज्यों तक पहुंचती थी लेकिन बदलते समय के साथ यह गौरवशाली पहचान धीरेधीरे सिमटने लगी।
अब जिला प्रशासन ने इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक स्वरूप देकर उसे फिर से नई उड़ान देने की पहल की है। इसी कड़ी में रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान परिसर में जिले की पहली पान दुकान का शुभारंभ कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने किया है। जिला प्रशासन, पान अनुसंधान केंद्र और कृषि महाविद्यालय के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई यह पहल केवल पान की बिक्री तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का नया माध्यम बनने जा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने कहा कि छुईखदान की पान खेती करीब 250 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और कृषि विरासत है। लंबे समय से यह पहचान कमजोर होती जा रही थी इसलिए जिला प्रशासन ने पिछले एक वर्ष से किसानों के साथ मिलकर इसे पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया। किसानों गुणवत्तापूर्ण पौधे, आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इस वर्ष कई किसानों ने दोबारा पान की खेती प्रारंभ की है। श्री चंद्रवाल ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि बेहतर विपणन व्यवस्था भी आवश्यक है।
दुकान में मिलेगी पान की अलगअलग वैरायटी दुकान में पान चॉकलेट, पान अप्पे, पान चीला, पान सैंडविच, पान पाउडर, पान रिफ्रेश और पान लड्डू जैसे आकर्षक मूल्यवर्धित उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। दुकान का संचालन सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा। कार्यक्रम में समाजसेवी नवनीत जैन, भावेश कोचर, राजीव जंघेल, रोशन चंद्राकर, संदीप महोबिया, दीपक देशमुख, संजय शर्मा, डॉ. विनय गिरपुंजे, पन्ना मंडावी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक, महिला स्वसहायता समूहों की सदस्याएं, किसान एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।



