
लखनऊ, अमृत विचार: जिला विद्यालय निरीक्षक लखनऊ द्वारा जारी एक नए आदेश ने माध्यमिक शिक्षकों और शिक्षक संगठनों के गुस्से को भड़का दिया है। डीआईओएस कार्यालय ने 30 जुलाई को पत्र जारी कर शिक्षकों, कर्मचारियों और संगठन के पदाधिकारियों के बिना पूर्व अनुमति या छुट्टी के दफ्तर आने पर रोक लगा दी है।
पत्र में कहा गया है कि बिना अनुमति के दफ्तर में आने से गोपनीयता भंग होती है और काम बाधित होता है। अब मुख्य द्वार पर ही रजिस्टर बनेगा और बिना पहचान पत्र व लिखित अधिकार पत्र के किसी को अंदर घुसने नहीं दिया जाएगा।
इस नोएंट्री फरमान के खिलाफ उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्र की मौजूदगी और जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में इस पत्र को शिक्षकों के स्वाभिमान पर हमला करार दिया गया। संघ ने साफ कहा कि दफ्तर में शिक्षकों की आवाजाही पर रोक लगाने के बजाय डीआईओएस कार्यालय में सिटिजन चार्टर को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि शिक्षकों को छोटीछोटी फाइलों और कामों के लिए बारबार चक्कर न लगाने पड़ें।
संगठन ने चेतावनी दी है कि डीआईओएस अपने इस पत्र में तुरंत संशोधन करें और शिक्षकों का सम्मान बहाल करें। बैठक में प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्र ने कड़े शब्दों में कहा कि शिक्षकों और संगठन की आवाज दबाने या उनके खिलाफ बोलने वालों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक का संचालन जिला मंत्री महेश चंद्र ने किया।


