Yavatmal Bhoodan Land: महान संत आचार्य बिनोवा भावे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में भूमिहीनों को कृषि जमीन उपलब्ध कराने के लिए एक महान आंदोलन चलाया गया था जिसका नाम था भूदान यज्ञ। मारेगांव तहसील में भूदान के तहत आवंटित की गई जमीनों के वर्गीकरण और हस्तांतरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि शासन की पूर्व अनुमति के बिना वर्ग2 की भूदान भूमि का आपसी बंटवारा कर बाद में उसकी बिक्री कर दी गई।

यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाती है तो करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, तहसील के बोदाड निवासी मारोती कान्हू जोगी को न्यायालय के आदेश के आधार पर 16 मार्च 1981 को ग्राम मार्डी स्थित लगभग 12 एकड़ जमीन भूदान यज्ञ विभाग द्वारा खेती और आजीविका के उद्देश्य से आवंटित की गई थी।
मारेगांव में भूदान जमीन लीज और बिक्री विवाद
आरोप है कि कुछ वर्षों बाद भूदान कानून के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए इस जमीन का तीन पुत्रों के बीच चारचार एकड़ के हिस्सों में बंटवारा कर दिया गया। इसके बाद 11 जनवरी 2000 को कथित रूप से भूदान अधिनियम के नियमों को दरकिनार करते हुए तीनों हिस्सों की जमीन वसंत जिनिंग को बेच दी गई। बाद में वर्ष 2023 में इसी जमीन में से चार एकड़ भूमि वसंत जीनिंग द्वारा गजानन चौधरी को बायो फ्यूल प्लांट स्थापित करने के लिए 10 वर्ष की लीज पर लगभग 24 लाख 86 हजार रुपये में दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
बताया जाता है कि के राजस्व विभाग के फेरफार दस्तावेजों में संबंधित भूमि पर लीजधारक के रूप में गजानन चौधरी का नाम दर्ज है, जबकि हक अभिलेखों में यह जमीन आज भी भूदान यज्ञ के नाम पर दर्ज बताई जा रही है। इससे तत्कालीन पटवारी, मंडल अधिकारी और तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किस आधार पर यह फेरफार दर्ज किए गए, अब इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन और जिलाधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि मामले की गहन जांच कराई जाती है तो भूदान की अन्य जमीनों से जुड़े कई और मामलों का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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जांच पड़ताल में सामने आया मामला
मारेगांव तहसीलदार उत्तम नीलावाड़ ने कहा कि शासन स्तर से सरकार द्वारा वितरित की गई सभी भूमियों के रिकॉर्ड का ऑडिट करने के निर्देश प्राप्त हुए थे। संपूर्ण महाराष्ट्र में यह मुहिम चलाई गई थी। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान के मार्डी की 12 एकड़ भूदान की जमीन वसंत जिनिंग को बेचे जाने का मामला सामने आया है। ऐसी जमीनों को वापस लेने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।


