अयोध्या : राम मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी कांड के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर ‘ऑपरेशन क्लीन’ और बदलावों का दौर जारी है। व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट के अहम पदों पर काबिज दिग्गजों की एक के बाद एक छुट्टी हो रही है। महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के दायित्वों में बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कद्दावर नेता भैयाजी जोशी पर भी गाज गिरी है। उन्हें राम मंदिर के संगठन संरक्षक की अहम जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है।

खत्म हुआ भैयाजी जोशी का दखल
सूत्रों की मानें तो संघ के दिग्गज पदाधिकारी भैयाजी जोशी अब राम मंदिर के पालक की भूमिका में नजर नहीं आएंगे। इससे पहले वह ट्रस्ट की सभी महत्वपूर्ण बैठकों में एक आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होते थे। उनका मुख्य काम संघ और राम मंदिर ट्रस्ट के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। अब उनके दायित्व से मुक्त होने के बाद ट्रस्ट और संगठन के बीच तालमेल बैठाने के लिए नए पालक की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस दिग्गज प्रचारक को मिल सकती है कमान
भैयाजी जोशी के हटने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर राम मंदिर का नया संगठन संरक्षक कौन होगा? जानकारी के मुताबिक, इस अहम और बड़ी जिम्मेदारी के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के नाम पर सबसे ज्यादा मंथन चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में कार्यरत एक वरिष्ठ और दिग्गज प्रचारक इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस पर ट्रस्ट या संघ की तरफ से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
चोरी कांड के बाद से ट्रस्ट में मचा है हड़कंप
गौरतलब है कि जब से राम जन्मभूमि परिसर में दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है, तब से ही ट्रस्ट के भीतर लगातार बड़े सांगठनिक फेरबदल देखने को मिल रहे हैं। व्यवस्थाओं को सख्त बनाने के लिए पहले चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव जैसे बड़े चेहरों के दायित्वों में परिवर्तन किया गया था। अब भैयाजी जोशी को जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने को इसी बदलाव की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि नए पालक की नियुक्ति होते ही ट्रस्ट का नया संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगा और कार्यों में और अधिक पारदर्शिता आएगी।



