IndiaTrending

युद्ध और महंगाई ने ईरान को किया बेहाल, खर्च चलाने के लिए लोग बेच रहे बाल, लैपटॉप भी किराए पर दे रहे परिवार..

युद्ध और महंगाई ने ईरान को किया बेहाल, खर्च चलाने के लिए लोग बेच रहे बाल, लैपटॉप भी किराए पर दे रहे परिवार..

आर्थिक संकट ने बदली लोगों की जिंदगी

ईरानी समाचार एजेंसी आईएलएनए (ILNA) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग आय जुटाने के लिए असामान्य तरीके अपना रहे हैं। कई परिवार अपने असली बाल , लैपटॉप , इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें , सेकेंड हैंड कपड़े , जूते और घरेलू सामान ऑनलाइन बेच रहे हैं। कुछ लोग इन वस्तुओं को बेचने के बजाय किराए पर देकर भी कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘सर्वाइवल इकॉनमी’ का उभरता मॉडल

रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान में एक नई तरह की ‘सर्वाइवल इकॉनमी’ विकसित हो रही है, जिसमें परिवार उन वस्तुओं को भी नकदी में बदल रहे हैं जिन्हें पहले कम महत्व का माना जाता था।

कई विक्रेता ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम कीमत वाली कई चीजों को एक साथ पैकेज बनाकर बेच रहे हैं, ताकि जल्दी नकदी मिल सके और घरेलू खर्च पूरे किए जा सकें।

लैपटॉप किराए पर लेने वालों की बढ़ी संख्या

आर्थिक तंगी के बीच लैपटॉप किराए पर देने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। ऑफिस के काम, ऑनलाइन पढ़ाई या अल्पकालिक जरूरतों के लिए लोग किराए पर लैपटॉप ले रहे हैं। इसी तरह कई परिवार ऐसे घरेलू सामान भी बाजार में उतार रहे हैं जिनकी दोबारा बिक्री पर पहले बहुत कम कीमत मिलती थी।

रिकॉर्ड महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें

आईएलएनए ने ईरान के सांख्यिकीय केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जुलाई के अंत में समाप्त हुए ईरानी महीने में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 66 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि साल-दर-साल महंगाई 87.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।

खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों और लोगों की घटती क्रय शक्ति ने परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कई लोग गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं, इलाज और दवाओं पर खर्च सीमित कर रहे हैं तथा मकान खरीदने की बजाय किराए पर रहना अधिक व्यावहारिक मान रहे हैं।

युद्ध खत्म होने के संकेत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के फिलहाल स्पष्ट संकेत नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को ईरान के लिए “आखिरी मौका” बताया, जबकि तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और अर्थव्यवस्था को राहत देने के प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तो ईरान में आम लोगों की आर्थिक परेशानियां और गहरा सकती हैं। वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि युद्ध का सबसे बड़ा बोझ आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply