
E20 पेट्रोल को लेकर देश में बहस जारी है. एक तरफ सरकार कह रही है कि सब कुछ कंट्रोल में है और पेट्रोल की क्वालिटी पर लगातार नजर रखी जा रही है. दूसरी तरफ ऑटोमोबाइल कंपनियों के सबसे बड़े संगठन SIAM की एक कथित रिपोर्ट में ऐसी बातें सामने आईं जिनमें इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम के अहम पार्ट्स के तेजी से खराब होने की बात कही गई.
दिलचस्प बात यह है कि जिस मीडिया रिपोर्ट में ये दावे किए गए, उन्हें बाद में हटा भी लिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर E20 पेट्रोल को लेकर असली तस्वीर क्या है? क्या यह सिर्फ कुछ गिने-चुने मामलों की बात है या फिर देशभर में लागू हो चुके E20 फ्यूल के साथ क्वालिटी कंट्रोल की कोई बड़ी चुनौती सामने आ रही है? यही समझना सबसे जरूरी है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने दावा किया है कि, खराब फ्यूल की वजह से इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम के कई जरूरी पार्ट्स तेजी से खराब हो रहे हैं. हालांकि, सरकार ने इन दावों पर सफाई देते हुए कहा है कि पेट्रोल की क्वॉलिटी पर लगातार नजर रखी जा रही है और मिलावट या कॉन्टैमिनेटेड (दूषित) फ्यूल के मामले बेहद कम हैं.
E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी पर सवाल
सीएनबीसी टीवी-18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, SIAM ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी पर चिंता जताई थी. रिपोर्ट में कहा गया कि E20 पेट्रोल में ज्यादा क्लोराइड और नमी मिलने की वजह से फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, एग्जॉस्ट गैस रिसर्कूलेशन (EGR) वाल्व, एग्जॉस्ट सिस्टम और इंजन से जुड़े कई पार्ट्स तेजी से खराब हो रहे हैं. SIAM का कहना था कि फील्ड टेस्ट में क्लोराइड की वजह से जंग लगना और बिना वजह घिसावट इन खराबियों का बड़ा कारण सामने आया.
रिपोर्ट में क्या-क्या दावे किए गए
रिपोर्ट के मुताबिक, SIAM ने कहा कि E20 पेट्रोल लागू होने के बाद क्लोराइड से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. संस्था का कहना था कि ज्यादा क्लोराइड इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम में तेजी से जंग लगा सकता है. इससे वाहन तुरंत खराब हो सकते हैं या फिर लंबे समय में बड़ी तकनीकी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं तो लोगों का इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर भरोसा कम हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वाहनों के फ्यूल टैंक से लिए गए सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 500 mg/kg तक पाई गई. वहीं, कुछ पेट्रोल पंपों से लिए गए सैंपल में यह लेवल 350 mg/kg तक बताया गया. SIAM ने सरकार से मांग की कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS), भारतीय मानक ब्यूरो के फ्यूल स्टैंडर्ड में क्लोराइड की अधिकतम सीमा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. संस्था ने E20 और E85 फ्यूल में कुल क्लोराइड की सीमा 1 mg/kg से कम रखने की सिफारिश की है.
नमी भी बनी चिंता की वजह
रिपोर्ट में केवल क्लोराइड की ही नहीं, बल्कि E20 पेट्रोल में ज्यादा नमी को भी बड़ी समस्या बताया गया. दावा किया गया कि कई सैंपल में नमी का स्तर (मॉइस्चर लेवल) 10,000 mg/kg से ज्यादा था, जबकि तय सीमा 3,000 mg/kg है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि, जब फ्यूल में इतनी ज्यादा नमी होगी तो इसका सीधा असर व्हीकल के इंटर्नल कंपोनेंट्स पर पड़ेगा. इथेनॉल की खासियत यह है कि वह वातावरण से नमी खींचता है. ऐसे में ज्यादा नमी होने पर फ्यूल अलग-अलग परतों में बंट सकता है, जिससे वाहन में फ्यूल भरवाने के तुरंत बाद भी इंजन बंद होने जैसी समस्या आ सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक SIAM ने सरकार से कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां खराब फ्यूल की असली वजह का पता लगाएं और पूरे फ्यूल सप्लाई नेटवर्क की निगरानी को बेहतर करें. रिपोर्ट के मुताबिक, कई पुराने पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन में खराबी की वजह से पानी और दूसरी गंदगियां फ्यूल में पहुंच सकती हैं. इसलिए पुराने पेट्रोल पंपों का समय-समय पर निरीक्षण और ऑडिट कराने की भी सिफारिश की गई.
क्या कहती है सरकार
रिपोर्ट के सामने आने के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां देशभर में फ्यूल की क्वॉलिटी की रेगुलर टेस्टिंग करती हैं. मंत्रालय के मुताबिक, पहले से मौजूद टेस्टिंग सिस्टम के अलावा अब 87 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर दिन में 8 से 12 बार पानी की मिलावट की जांच भी की जा रही है. सरकार का कहना है कि पूरे देश से लिए गए 2,000 से ज्यादा सैंपल में सिर्फ दो मामलों में क्लोराइड की मौजूदगी मिली. उन दोनों पेट्रोल पंपों पर फ्यूल की बिक्री तुरंत रोक दी गई और आगे भी किसी तरह की मिलावट मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
पूरे मामले पर SIAM की सफाई
E20 पेट्रोल में क्लोराइड और नमी को लेकर उठे विवाद के बीच अब सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. संगठन ने कहा है कि रिपेार्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्हें अंतिम या प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए. SIAM ने भरोसा दिलाया कि फिलहाल आम वाहन मालिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है और फ्यूल की क्वॉलिटी की निगरानी तय नियमों के तहत लगातार की जा रही है.
SIAM के मुताबिक, मौजूदा नियमों के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) फ्यूल क्वॉलिटी की बेहद सख्त जांच करती हैं. फ्यूल टेस्टिंग के दौरान 150 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच की जाती है ताकि पेट्रोल की क्वॉलिटी से कोई समझौता न हो. SIAM ने बताया कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) पहले ही क्लोराइड और सल्फर की 3ppm लिमिट को एहतियाती उपाय के तौर पर लागू कर चुका है.
ये रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब देश भर में E20 पेट्रोल को लेकर घमासान मचा हुआ है. बीते कल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 के विरोध में पीएम हाउस तक मार्च निकाला था. इसके अलावा इंडस्ट्रियलिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और दिल्ली के ट्रांसपोर्ट यूनियन भी लगातार इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का विरोध कर रहे हैं.


