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Janeshwar Jayanti : जनेश्वर जयंती पर अखिलेश के बयान से गरमाई सियासत, हमलावर हुई भाजपा, ब्रजेश पाठक बोले- PDA फार्मूले को लेकर खुद भ्रमित है सपा

Janeshwar Jayanti : जनेश्वर जयंती पर अखिलेश के बयान से गरमाई सियासत, हमलावर हुई भाजपा, ब्रजेश पाठक बोले- PDA फार्मूले को लेकर खुद भ्रमित है सपा

लखनऊ, अमृत विचार: समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण, वोट बैंक की राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी का आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने पीडीए, ब्राह्मण राजनीति और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर सपा को घेरा।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण समाज से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। उनके अनुसार, ब्राह्मण सम्मेलन और सामाजिक न्याय की बातें केवल राजनीतिक दिखावा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का पूरा फोकस वोट बैंक की राजनीति पर है। कभी पीडीए का नया फार्मूला पेश किया जाता है तो कभी नए सामाजिक समीकरण गढ़े जाते हैं, लेकिन उद्देश्य केवल चुनावी लाभ हासिल करना होता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में विकास के बजाय अराजकता और गुंडाराज को बढ़ावा मिला। उनके मुताबिक, सपा की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय जातीय समीकरणों और तुष्टिकरण पर आधारित रही है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने आ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन के भीतर और बाहर पार्टी का रवैया अलगअलग रहता है। जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय सपा राजनीतिक विवाद खड़े करने का प्रयास करती है।

राम मंदिर पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं

केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि जो लोग वर्षों तक मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे और रामभक्तों पर गोली चलाने वाली राजनीति का हिस्सा रहे, उन्हें आज राम मंदिर पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह “चोरी भी और सीनाजोरी भी” जैसी स्थिति है।

”पीडीए नहीं, वोट बैंक की राजनीति”

ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी खुद अपने पीडीए फार्मूले को लेकर भ्रमित है। कभी सामाजिक समीकरण बदलने की बात करती है तो कभी नए राजनीतिक प्रयोग सामने लाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की पूरी रणनीति समाज के विभिन्न वर्गों को साथ जोड़ने के बजाय वोट बैंक की राजनीति तक सीमित है।

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