बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए हर साल करोड़ों श्रद्धालु देशविदेश से मथुरा के वृंदावन पहुंचते हैं. लेकिन वर्षों से शहर की संकरी सड़कों और भारी ट्रैफिक जाम के कारण श्रद्धालुओं को घंटों परेशानी झेलनी पड़ती है. अब इस समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी मथुरा हेरिटेज सिटी परियोजना को नई गति मिल गई है. करीब 6,922 करोड़ रुपये की इस परियोजना की निविदा को मंजूरी दे दी गई है. अब कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद डेवलपर का चयन किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू होगा.

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बांके बिहारी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से बचाते हुए सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है. इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग44 को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 15.3 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाई जाएगी.
यह सड़क आगे यमुना नदी पर प्रस्तावित सस्पेंशन ब्रिज से जुड़ेगी. इस नई कनेक्टिविटी के जरिए दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा और यमुना एक्सप्रेसवे से आने वाले श्रद्धालु बिना शहर के मुख्य ट्रैफिक में प्रवेश किए सीधे मंदिर क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे. इससे यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक जाम में भी कमी आएगी.
मंदिर के पास नहीं जाएंगे निजी वाहन
परियोजना के तहत मंदिर क्षेत्र में निजी वाहनों के प्रवेश को सीमित किया जाएगा. श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थल पर अपने वाहन खड़े करने होंगे. वहां से उन्हें ईरिक्शा और ईबस जैसी पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवाओं के माध्यम से बांके बिहारी मंदिर तक पहुंचाया जाएगा.
इस व्यवस्था से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की संख्या कम होगी. साथ ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं दोनों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. प्रशासन का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनेगा.
753 एकड़ में विकसित होगी हेरिटेज सिटी
मथुरा हेरिटेज सिटी परियोजना के तहत 753 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक परिसर विकसित किया जाएगा. यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
परियोजना में थीम पार्क, ध्यान केंद्र, प्रवचन स्थल, होटल, धर्मशालाएं, पर्यटन केंद्र, रेस्टोरेंट, संग्रहालय , प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ना और मथुरावृंदावन को अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है.
6,922 करोड़ रुपये की परियोजना
पूरी परियोजना पर लगभग 6,922 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इनमें से 1,954 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर खर्च होंगे, जबकि 1,310 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित किए गए हैं.
परियोजना को विकसित करने वाली कंपनी को 5 वर्ष का मोरेटोरियम और 70 वर्ष का संचालन लाइसेंस दिया जाएगा. यमुना प्राधिकरण का अनुमान है कि इस परियोजना से उसे प्रतिवर्ष करीब 34 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा.
जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार निविदा स्वीकृत होने के बाद अब प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलते ही डेवलपर का चयन किया जाएगा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी.
परियोजना के लिए करीब 22 हेक्टेयर भूमि सड़क निर्माण और पार्किंग व्यवस्था के लिए अधिग्रहित की जाएगी. इसके बाद नई सड़क, पार्किंग क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा.
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि मथुरा हेरिटेज सिटी परियोजना की निविदा को स्वीकृति मिल चुकी है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद डेवलपर का चयन कर परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारा जाएगा.
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल बांके बिहारी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान नहीं बनाएगी, बल्कि पूरे मथुरावृंदावन क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास को नई दिशा देगी. बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था से आने वाले वर्षों में मथुरा देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में और अधिक सशक्त पहचान बना सकेगा.



