
अमृत विचार : दशकों पुराने भारतम्यांमार के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों ने मिलकर एक पहल की है। भारत और म्यांमार ने मणिपुर सीमा तय करने के लिए संभावित क्षेत्रीय आदानप्रदान पर चर्चा की। दोनों देशों ने अपनी साझा सीमा के अनिर्धारित हिस्सों को हल करने के लिए बातचीत की है। जिसमें मणिपुर में सीमा स्तंभ 65 और 68 के बीच संवेदनशील खंड भी शामिल है।
बता दें कि दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लैंड स्वैप को लेकर पूछे गए सवाल में बताया भारत और म्यांमार बिना निशान वाले बॉर्डर हिस्सों को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मणिपुर के चंदेल जिले में पिलर 65 और 68 के बीच लगभग 1.4 वर्ग मील ज़मीन का लेनदेन हो सकता है।
इस कदम का मकसद सीमांकन को आखिरी रूप देना है ताकि भारत गैरकानूनी इमिग्रेशन और बगावत के खिलाफ 1,643 km लंबे बॉर्डर पर बाड़ लगा सके। मणिपुर में लोकल ग्रुप्स ने ज़मीन के किसी भी ट्रांसफर पर सफाई की मांग करते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। जायसवाल ने भूमि अदलाबदली की रिपोर्टों पर सीधे तौर पर कोई पुष्टि या खंडन नहीं किया। लेकिन उनके बयान से इतना साफ हो गया कि भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से लंबित सीमा निर्धारण के मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ रही है।
क्यों चर्चा में आया घटनाक्रम
भारतम्यांमार सीमा को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब अमेरिकी पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत सरकार मणिपुर से लगी भारतम्यांमार सीमा पर सीमांकन पूरा करने के लिए एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। 17 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट में एक कथित सरकारी दस्तावेज़ का हवाला देते हुए कहा गया है कि बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमा निर्धारण को अंतिम रूप देने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन की अदलाबदली का प्रस्ताव विचाराधीन है। मणिपुर से लगी सीमा का यह इलाका रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस तरह की किसी भी संभावित सीमा व्यवस्था या जमीन के आदानप्रदान से जुड़े प्रस्ताव पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।



