
उन्नाव, अमृत विचार : लगभग 4,700 करोड़ से बने लखनऊकानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने का शुरू हुआ सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इससे कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। स्थिति यह है कि निर्माण एजेंसी जहां एक ओर दरारों व धंसाव ठीक करने के लिए मरम्मत शुरू कराती है वहीं दूसरी ओर सड़क पर नई खामी उभरकर सामने आ जाती है।
बता दें कि अभी एजेंसी कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर मरम्मत करा ही रही थी कि गुरुवार को लखनऊ से कानपुर जाने वाले मार्ग पर भी सड़क धंसने का नया मामला सामने आ गया। मार्ग धंसने की सूचना से कार्यदायी संस्था के कर्मचारी आननफानन में वहां पहुंचे और दूसरी लेन पर भी मरम्मत शुरू कराई। लगातार सामने आ रही इन खामियों के कारण वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
राहगीरों का कहना है कि इतने बड़े बजट की परियोजना में बारबार सड़क का धंसना घटिया निर्माण व घटिया तकनीक की ओर इशारा करता है। फिलहाल एजेंसी दोनों लेन पर मरम्मत का दावा कर रही है, लेकिन बारबार आ रही इन दरारों ने निर्माण की नींव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीएनसी के जनरल मैनेजर सत्या नारायण ने बताया कि हल्की सी दिक्कत आई है। उसकी मरम्मत कराई जा रही है।
अखिलेश यादव के ट्वीट से गरमाई सियासत
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर धंसे एक्सप्रेसवे को लेकर एक्स पर ट्वीट किया कि ‘ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा…’ कुछ दिन पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल हो रहा है ये भी हास्यास्पद है।
23 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा। सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी… या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्साबांट’ हो चुका है। भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है… धंसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है।



