
हरियाणा के गुरुग्राम से ठगी का अनोखा मालाला सामने आ रहा है, यहां खुद को बीमा लोकपाल का अधिकारी बताकर एक शख्स से अलग-अलग बैंक खातों में 1.19 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
मामले में पुलिस ने बताया कि 27 जुलाई को एक शख्स ने साइबर अपराध पश्चिम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि कुछ अज्ञात लोगों ने बीमा लोकपाल अधिकारी बनकर उससे संपर्क किया और बंद हो चुकी कई बीमा पॉलिसी के बदले 57 लाख रुपये वापस दिलाने का झांसा दिया।
बंद बीमे से करोड़ों मिलने का लालच
आरोपियों ने उसे भरोसा दिलाया कि एजेंट कोड समाप्त करने के बाद लाभार्थी कोड ट्रांसफर कराने में वे उसकी मदद करेंगे और उसे करीब 1.04 करोड़ रुपये मिल जाएंगे। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने फाइल शुल्क, रखरखाव शुल्क, लेनदेन शुल्क, पूर्ण एवं अंतिम निपटान शुल्क और अन्य खर्चों के नाम पर पीड़ित को अलग-अलग समय पर कई बैंक खातों में करीब 1.19 करोड़ रुपये जमा करने के लिए राजी किया।
जाली पैन औऱ आधार पर खुलवाया बैंक खाता
सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर) गौरव फोगाट ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि हक ने अपने साथियों की मदद से कथित तौर पर ”उत्सव उपाध्याय” के नाम पर जाली आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके एक बैंक खाता खुलवाया था, जिसमें शिकायतकर्ता के लगभग 43 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। उन्होंने कहा कि भारत जनक सिंह कपाड़िया ने कथित तौर पर चेक के माध्यम से यह रकम निकाली और अपना तथा एक अन्य आरोपी का कमीशन रखने के बाद बाकी नकदी अपने साथियों को सौंप दी।
सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि कुमार साइबर कैफे चलाता है और उसने कथित तौर पर फर्जी आधार व पैन कार्ड तैयार किए, जबकि गुसाईं ने जाली दस्तावेज तैयार करने, सिम कार्ड हासिल करने और धोखाधड़ी वाले फोन के लिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड उपलब्ध कराने में मदद की, उन्होंने आगे कहा कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है।



