इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद फर्जी शैक्षिक डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोप में 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है. अलगअलग विश्वविद्यालयों से कथित तौर पर फर्जी डिग्री हासिल कर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराने के मामले में पुलिस ने इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है.

मामला बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर दर्ज किया गया है. आरोप है कि संबंधित अधिवक्ताओं ने अलगअलग विश्वविद्यालयों की डिग्रियों के आधार पर बार काउंसिल में पंजीकरण कराया, लेकिन सत्यापन के दौरान उनकी डिग्रियां कथित रूप से फर्जी पाई गईं.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद कोर्ट ने फर्जी डिग्री के आधार पर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के मामलों को गंभीरता से लिया. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जून 2026 को हाईकोर्ट की ओर से इस संबंध में आदेश दिया गया था, जिसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ी.
बार काउंसिल की ओर से की गई शिकायत पर पुलिस ने 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. अब विवेचना में उनकी डिग्रियों, विश्वविद्यालयों से जारी प्रमाणपत्रों और बार काउंसिल में पंजीकरण के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
कई जिलों से जुड़े हैं आरोपी
एफआईआर में शामिल अधिवक्ताओं का संबंध लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मथुरा, गौतमबुद्धनगर, हरदोई, सहारनपुर, गाजियाबाद और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों से बताया गया है. एफआईआर में शामिल नामों में सुनील कुमार अवस्थी, नफीजुल हसन सिद्दीकी, शोभित कुमार यादव, पंकज कुमार, जय नारायण कटियार, नफीस अहमद, देवेश कुमार, श्याम सिंघल, पवन हिंदोल, दीपक कश्यप, अभय सर्वसेना और सत्यम मिश्रा शामिल हैं.
दो राजनीतिक चेहरों के नाम भी चर्चा में
मामले में शामिल श्याम सिंघल को पवन हिंदोल का संबंध भाजपा से है. हालांकि, इन सभी मामलों में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी. पुलिस की विवेचना में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित डिग्रियां किन विश्वविद्यालयों से जारी हुईं? उनकी वास्तविकता क्या है और बार काउंसिल में पंजीकरण के समय उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ? इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि यदि दस्तावेज फर्जी थे तो उनके आधार पर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कैसे हुआ?



