
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की टीम ने एक बड़े पैन-इंडिया साइबर इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए करीबन 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि इस मामले में साइबर पुलिस की टीम ने देश के अलग-अलग राज्यों में दबिश देकर करीब 9 आरोपियों धर दबोच लिया है। साथ ही पुलिस की टीम को पता चला है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और पंजाब तक फैले हुए थे। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों का कनेक्शन 34 एनसीआरपी शिकायतों से है। इनमें ठगी की रकम 15 करोड़ 71 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। हालाकि दिल्ली में दर्ज 7 साइबर फ्रॉड केस भी इस नेटवर्क से जुड़े मिले हैं, जिनमें करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपये की ठगी भी इसमें शामिल है। इस मामले में पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली के पालम कॉलोनी निवासी एक शख्स द्वारा किए गए शिकायत के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ है।
पीड़ित को व्हाट्सऐप पर ऐसे ग्रुप में जोड़ा गया था, जिन्हें इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग सीखने के प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया गया था। हालाकि आरोपियों ने खुद को मार्केट एनालिस्ट और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बताया था। साथ ही फर्जी ट्रेडिंग सेशन व सफलता की कहानियां और मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीत लिया था, जिसके बाद उसे एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन के जरिए निवेश करने के लिए बोला गया था। हालाकि पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों के जरिए करीब 4 लाख 82 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। शुरुआत में आरोपियों ने थोड़ी रकम निकालने की अनुमति भी दी, जिससे पीड़ित को प्लेटफॉर्म के असली होने का भरोसा हुआ है, जिसके बाद आरोपियों ने आईपीओ अलॉटमेंट के नाम पर करीब 7 लाख 81 हजार रुपये और जमा करने को बोला था। इसी बीच शक होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की थी। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। हालाकि जांच में पुलिस ने पैसों के ट्रेल के साथ-साथ बैंक खातों, ट्रांजैक्शन डिटेल, मोबाइल डेटा और व्हाट्सऐप चैट की जांच शुरू कर दी है। इस दौरान पुलिस को महाराष्ट्र के नंदुरबार तक आरोपियों के कनेक्शन मिले थे, जहां से शोएब दिलावर सैय्यद को गिरफ्तार किया गया था। उसके मोबाइल से कई अहम चैट और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी चार अन्य लोगों के साथ केरल गया था, जहां कथित बिजनेस फर्म बनाकर उनके नाम पर करंट अकाउंट खुलवाए गए थे।
साथ ही आरोपी (ब्रदरहुड) नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हुए थे। इसी ग्रुप में बैंक खातों से जुड़ी जानकारी शेयर की जाती थी, जिसके बाद पुलिस की जांच गुजरात पहुंच गई थी, जहां शेख आर. इम्तियाज, कमालशाह कादरशाह, सिद्दीकी एम. मुफीदभाई और हमजा हुमायू को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया गया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों ने पैसों के बदले अपने करंट अकाउंट उपलब्ध कराए थे, जिसके बाद में इन्हें केरल ले जाया गया, जहां कथित तौर पर फर्जी बिजनेस एंटिटी और म्यूल करंट अकाउंट तैयार किए गए थे।
हालाकि केरल से मुजम्मिल थैब और जमालुद्दीन फैसल को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी मुजम्मिल बैंक अकाउंट होल्डर्स से संपर्क कर उनके रहने की व्यवस्था और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए बैंक डिटेल और ओटीपी शेयर करने में कथित तौर पर शामिल था। साथ ही जमालुद्दीन पर फर्जी बिजनेस एंटिटी बनाने और बैंक अकाउंट खुलवाने में मदद करने का आरोप है। हालाकि पैसों का ट्रेल पंजाब तक भी पहुंच गया था, जहां से सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच में इस नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन भी सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरोपी जमालुद्दीन फैसल ने कतर में रहने के दौरान नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में होने की जानकारी दी है। साथ ही सैम नाम का संदिग्ध मुख्य कोऑर्डिनेटर कथित तौर पर दुबई से ऑपरेशनल गतिविधियां मैनेज कर रहा था और रिया, सैम, फरहाज के साथ ही एक बैंक कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सभी आरोपियों का तरीका भी बेहद शातिर था।
हालाकि व्हाट्सएप पर इन्वेस्टमेंट ग्रुप बनाए जाते थे और लोगों को एक्सक्लूसिव इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम में निवेश का भरोसा दिलाया जाता था। साथ ही फर्जी ट्रेडिंग एप पर मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया जाता था, लेकिन जैसे ही पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करता था, तो उससे टैक्स, ब्रोकरेज, आईपीओ अलॉटमेंट, अकाउंट वेरिफिकेशन, प्रोसेसिंग फीस या मार्जिन के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे, जिसके बाद ठगी की रकम को कई म्यूल अकाउंट और कथित शेल फर्मों के करंट अकाउंट के जरिए अलग-अलग जगह ट्रांसफर कर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी।
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, इनमें व्हाट्सएप चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, डिजिटल क्रेडेंशियल और ट्रांजैक्शन से जुड़ा अहम डेटा मिला है। जांच में दिल्ली के 7 अलग-अलग साइबर फ्रॉड केस भी इस नेटवर्क से जुड़े मिले हैं, जिनमें करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। अब पूरे नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों का कनेक्शन 34 एनसीआरपी शिकायतों और 15 करोड़ 71 लाख रुपये से ज्यादा के फर्जी ट्रांजैक्शन सामने आया है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे आरोपियों, बैंक खातों और विदेश में बैठे कथित ऑपरेटरों की भूमिका की जांच कर रही है।



