टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी के टॉप पोस्ट से इस्तीफा दे दिया है. यह भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप में से एक में लीडरशिप में बड़े बदलाव का संकेत है. मीडिया रिपोर्ट के के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन वे फरवरी में अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक इस भूमिका में बने रहेंगे. वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे. यह इस्तीफा 18 अगस्त, 2026 को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक से पहले आया है. यह घटनाक्रम टाटा संस बोर्ड में चंद्रशेखरन के बने रहने को लेकर अनिश्चितता और टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े तनाव के बाद हुआ है. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े थे. 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभालने से पहले, वे 2009 में TCS के CEO बने थे.

एक साल में कितनी होती थी कमाई?
एन. चंद्रशेखरन वित्त वर्ष 2026 में भारत के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स में से एक थे. टाटा संस की लेटेस्ट सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में उनका कुल वेतन बढ़कर 158.66 करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 155.81 करोड़ रुपए था.
चंद्रशेखरन की सैलरी का एक बड़ा हिस्सा उनके मुनाफे से जुड़े कमीशन से आता था. वित्त वर्ष 2026 में उनके वेतन में 17.97 करोड़ रुपए सैलरी और बेनिफिट्स के तौर पर और 140.69 करोड़ रुपए कमीशन के तौर पर शामिल थे. कमीशन वित्त वर्ष 2025 के मुकाबले वैसा ही रहा, जबकि सैलरी और अन्य बेनिफिट्स 15.12 करोड़ रुपए से बढ़ गए.
जब से टाटा संस ने एग्जीक्यूटिव्स के वेतन का खुलासा करना शुरू किया है, तब से उनके वेतन में काफी बढ़ोतरी हुई है. टाटा संस की सालाना रिपोर्ट के डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 तक के पांच सालों में चंद्रशेखरन को लगभग 685 करोड़ रुपए का वेतन मिला.
वित्त वर्ष 2026 के पैकेज ने चंद्रशेखरन को भारत के सबसे ज़्यादा सैलरी पाने वाले कॉर्पोरेट लीडर्स में से एक बना दिया है, हालांकि पूरे 158.66 करोड़ रुपये को “सैलरी” कहना गलत होगा क्योंकि इसका ज़्यादातर हिस्सा मुनाफे से जुड़ा कमीशन था.
एन चंद्रशेखरन की नेट वर्थ
उनकी अनुमानित नेट वर्थ लगभग 100150 मिलियन डॉलर है. वह मुंबई में 98 करोड़ रुपए के एक शानदार डुप्लेक्स में रहते हैं, जो मुकेश अंबानी के मशहूर घर ‘एंटीलिया’ के पास है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े अलगअलग रिपोर्ट पर आधारित हैं और उनकी नेट वर्थ की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में तरक्की करते हुए इसके चीफ एग्जीक्यूटिव और मैनेजिंग डायरेक्टर बने. वह 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में रतन टाटा की जगह टाटा संस के चेयरमैन बने.



