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इटावा में कफ सीरप तस्करी का बड़ा खुलासा: जेडीयू नेता के बेटे समेत तीन गिरफ्तार, 50 लाख की खेप जब्त

इटावा: प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी के मामले में इटावा पुलिस की कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है. देहरादून से बिहार ले जाई जा रही करीब 50 लाख रुपये कीमत की कफ सीरप की खेप के साथ बिहार के एक जेडीयू नेता के बेटे समेत तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपितों के कब्जे से 40 हजार शीशियों वाला कफ सीरप और 4 लाख 35 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं.

पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों को जेल भेज दिया है. सीओ सिटी अभय नारायण राय के अनुसार गुरुवार रात भरथना चौराहे पर पुलिस वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान सूचना मिली कि गौरापुरा गांव के पास एक मिनी ट्रक खड़ा है, जिसमें प्रतिबंधित कफ सीरप लदा हुआ है. मौके पर पहुंची पुलिस ने मिनी ट्रक के साथ पास में खड़ी बिहार नंबर की कार को भी घेर लिया. जांच के दौरान कार सवार तीन लोगों को हिरासत में लिया गया.

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान विकास कुमार निवासी ग्राम बेलामेघ थाना उजियारपुर, सोनू कुमार निवासी ग्राम रामपुर बघेल थाना सघेई बुजुर्ग तथा अरुण राय निवासी ग्राम सलेमपुर पोस्ट रामपुर बघेल थाना सघेई बुजुर्ग, जिला वैशाली (बिहार) के रूप में हुई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इनमें से एक आरोपित बिहार के एक जेडीयू जिलाध्यक्ष का बेटा बताया जा रहा है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है.

तलाशी के दौरान मिनी ट्रक से 400 पेटियों में भरी 40 हजार शीशियां प्रतिबंधित कफ सीरप बरामद की गईं. यह कफ सीरप बिहार में इतनी बड़ी मात्रा में खरीदने और बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंधित है. पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे यह सीरप उत्तराखंड के देहरादून स्थित बिंडलास बायोटेक कंपनी से ई-बिल के माध्यम से खरीदकर बिहार के समस्तीपुर स्थित डिवाइन इंटरप्राइजेज कंपनी ले जा रहे थे. आरोपितों ने कंपनी के बिल भी पुलिस को दिखाए.

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने में किया जा रहा था और इस तस्करी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा. मामले के खुलासे के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में हड़कंप मचा हुआ है.

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