
लखनऊ, अमृत विचार। नेशनल हाईवे पर सड़क हादसे के बाद एंबुलेंस के पहुंचने में होने वाली देरी अब ठेकेदारों और एंबुलेंस ऑपरेटरों पर भारी पड़ेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एंबुलेंस सेवाओं को लेकर समयसीमा तय करते हुए नए नियम जारी किए हैं। नियमों का उल्लंघन होने पर देरी के हिसाब से सीधे जुर्माना लगाया जाएगा।
एक मिनट में कॉल स्वीकार नहीं तो 5 हजार रुपये जुर्माना
NHAI के नए नियमों के मुताबिक इमरजेंसी कॉल या टिकट को एक मिनट के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे ज्यादा देरी होने पर हर अतिरिक्त मिनट के लिए 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। कॉल स्वीकार करने के बाद एंबुलेंस को दो मिनट के भीतर रवाना होना होगा। इसमें भी प्रत्येक अतिरिक्त मिनट की देरी पर 5 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।
10 किलोमीटर के दायरे में 10 मिनट में पहुंचना होगा
अगर हादसा एंबुलेंस बेस से 10 किलोमीटर के दायरे में हुआ है तो एंबुलेंस को 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना होगा। देरी होने पर प्रत्येक घटना के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, 10 किलोमीटर से अधिक दूरी होने पर घटनास्थल तक पहुंचने का निर्धारित समय दूरी के आधार पर तय किया जाएगा।
घायल को एक घंटे में अस्पताल पहुंचाना जरूरी
NHAI के नए नियमों में घायल को अस्पताल पहुंचाने की समयसीमा भी तय की गई है। हादसे के बाद मरीज को एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाना होगा। इसमें देरी होने पर भी प्रति घटना 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। यदि कोई एंबुलेंस इमरजेंसी टिकट लेने से ही इनकार करती है तो प्रत्येक मामले में 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
GPS बंद मिला तो रोज 2500 रुपये कटेंगे
एंबुलेंस की निगरानी के लिए GPS और ऐप को लेकर भी सख्ती की गई है। यदि GPS बंद पाया गया, एंबुलेंस ऐप पर ऑनलाइन नहीं दिखी या डैशबोर्ड पर उसकी जानकारी उपलब्ध नहीं हुई तो प्रतिदिन 2,500 रुपये का जुर्माना लगेगा। जांच के दौरान दवा, मेडिकल उपकरण, ड्राइवर या EMT से संबंधित कमी मिलने पर प्रत्येक निरीक्षण के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
हर 24 घंटे में करना होगा ड्राई रन
नए नियमों के तहत प्रत्येक एंबुलेंस को 24 घंटे में कम से कम एक बार ड्राई रन या मॉक ड्रिल करनी होगी और इस दौरान कम से कम पांच किलोमीटर चलना होगा। हालांकि, यदि उसी दिन एंबुलेंस किसी हादसे में गई है और उसका कुल आवागमन पांच किलोमीटर से अधिक है तो उस दिन ड्राई रन की शर्त लागू नहीं होगी।
पड़ोसी हाईवे की एंबुलेंस भी करनी होगी मदद
NHAI ने एंबुलेंस की उपलब्धता को लेकर भी अहम बदलाव किया है। यदि पड़ोसी हाईवे सेक्शन की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है तो दूसरी एंबुलेंस को अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर भी हादसे की जगह पहुंचना होगा। यानी एंबुलेंस के क्षेत्र की सीमा बताकर मदद से इनकार नहीं किया जा सकेगा।
CARE सिस्टम से होगी जुर्माने की गणना
NHAI के CARE सिस्टम के जरिए जुर्माने की गणना की जाएगी। जुर्माने की रकम एंबुलेंस सेवा के मासिक भुगतान, EPC प्रोजेक्ट के तिमाही मेंटेनेंस भुगतान या HAM प्रोजेक्ट के छमाही भुगतान से काटी जाएगी। हालांकि, एक महीने में किसी सेवा प्रदाता पर लगाया जाने वाला कुल जुर्माना 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होगा।
GPS और ऐप की लापरवाही पर NHAI सख्त
NHAI के अनुसार GPS और CARE ऐप के इस्तेमाल में लापरवाही तथा एंबुलेंस के ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आती रही है। इससे सड़क हादसे के बाद घायलों तक समय पर मदद पहुंचने में देरी होती है और उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सड़क हादसों के बाद एंबुलेंस की देरी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति और CAG के परफॉर्मेंस ऑडिट में भी उठाया जा चुका है। इसी को देखते हुए NHAI ने अब एंबुलेंस की प्रतिक्रिया और अस्पताल पहुंचाने की समयसीमा को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।


