
लखनऊ, अमृत विचार। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विधान भवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विभिन्न राज्यों के कलाकारों से अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ के एक कलाकार के ‘बुलडोजर बाबा’ कहने पर मुख्यमंत्री ने अपने चिरपरिचित अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।”
‘बुलडोजर बाबा’ कहने पर मुस्कुराए योगी
संवाद के दौरान छत्तीसगढ़ के कलाकार कुलभूषण चंद्राकर ने कहा कि उनके प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से जाना जाता है। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह गाना नहीं गा सकते, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर चलवा सकते हैं। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर वहां मौजूद कलाकारों के बीच माहौल हल्काफुल्का हो गया।
आठ राज्यों से पहुंचे थे कलाकार
मुख्यमंत्री ने जम्मूकश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए कलाकारों से बातचीत की। उन्होंने कलाकारों से उनके अनुभव जाने और प्रदेश में घूमने की उनकी इच्छाओं के बारे में भी जानकारी ली। कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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‘विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की विविधता में एकता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। कलाकार देश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक वाहक हैं। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना तभी साकार होगा, जब देश के अलगअलग क्षेत्रों के लोग एकदूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझेंगे। उन्होंने कहा कि कलाकार केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोक संस्कृति के संवाहक भी हैं। उनकी प्रस्तुतियों में अतीत की स्मृतियां और भविष्य की प्रेरणा छिपी होती है।
कलाकारों ने की अयोध्याकाशी की तारीफ
जम्मूकश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं कलाकार श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलाकारों ने उत्तर प्रदेश में मिले सम्मान और व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने अयोध्या और काशी में दर्शन की सुविधाओं के लिए भी मुख्यमंत्री का आभार जताया।
अलगअलग राज्यों की लोक कलाओं ने बांधा समां
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक रंग बिखेरा। जम्मूकश्मीर के रउफ और डोंगरी नृत्य, महाराष्ट्र के नमन एवं डिंडी, अरुणाचल प्रदेश के पराई, त्रिपुरा के डारलॉन्ग, बिहार के झिंझिया, मध्य प्रदेश के गुदुमबाजा, गुजरात के तलवार रास, छत्तीसगढ़ के रेला पाटा और उत्तर प्रदेश के कथक ने दर्शकों का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों और कोरियोग्राफरों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया।
लोक संस्कृति को बढ़ावा दे रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार दीपोत्सव, रंगोत्सव, जन्माष्टमी, माघ मेला और आल्हा महोत्सव जैसे आयोजनों के जरिए लोक परंपराओं को नई पहचान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र और जिले में सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित होने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और लोक संस्कृति अगली पीढ़ी तक पहुंच सके।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के साथ देश की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। प्रत्येक भारतीय को देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जानने का प्रयास करना चाहिए।



