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राजस्थान में तबादलों पर बड़ी गफलत, एक ही दिन जारी हुईं दो अलग-अलग सूची

जयपुर
राजस्थान सरकार की दो अलगअलग ‘तबादला सूची’ की वजह से बड़ी गफलत सामने आई है। ये गफलत तब सामने आई जब राजस्व विभाग में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण/पदस्थापन आदेशों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, एक ही दिन में दो अलगअलग प्रशासनिक स्तरों से दो अलगअलग तबादला सूचियां जारी होने से न केवल आम जनता में बल्कि खुद राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात अधिकारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बन गया। इस पूरे मामले में सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि राजस्व मंडल और राजस्व विभाग दोनों ने ही अपनीअपनी अलगअलग तबादला सूची जारी कर दी, जिससे पूरा मामला उलझ गया और आखिरकार सरकार को एक सूची पर तुरंत रोक लगानी पड़ी।

पहले आदेश जारी हुआ, फिर कुछ ही देर में रोक
राजस्थान राजस्व विभाग में जैसे ही तबादला सूची आई, वैसे ही राज्य के अलगअलग जिलों में काम कर रहे अधिकारियों और आम लोगों के बीच यह खबर आग की तरह फैल गई। लेकिन इस खुशी और चिंता के बीच एक नया मोड़ तब आया जब पता चला कि दो अलगअलग स्तरों पर तबादला आदेश तैयार किए गए थे।

राजस्व मंडल ने अलग सूची निकाली और जयपुर स्थित राजस्व विभाग ने अपनी अलग सूची जारी की। जब इस ‘गफलत’ या भ्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए राजस्व विभाग ने राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची पर रोक लगा दी। इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन में समन्वय की कितनी बड़ी कमी रही, जिसके कारण अधिकारियों को भी समझ नहीं आया कि उनका नया पदस्थापन आदेश कहां का है।

157 बनाम 164 तहसीलदार
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह तबादला आंकड़ों में आया अंतर है। विभिन्न जिलों में नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए ये दोनों सूचियां बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रही थीं

राजस्व मंडल की सूची: राजस्व मंडल ने कुल 157 तहसीलदार और 47 नायब तहसीलदार के तबादले का आदेश जारी किया था।

राजस्व विभाग की सूची: दूसरी तरफ, राजस्व विभाग ने 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार के तबादले के आदेश जारी कर दिए।

जब दोनों सूचियों का मिलान किया गया, तो संख्या में अंतर के साथसाथ कई अधिकारियों के नाम और पदस्थापन स्थानों में भी अंतर पाया गया। इस वजह से जिला स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।

तहसीलदार और नायब तहसीलदार किसी भी जिला प्रशासन की वह महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं जो जमीन, राजस्व, जाति प्रमाण पत्र, नामांतरण और स्थानीय कानूनव्यवस्था जैसे जरूरी कामों से सीधे जुड़े होते हैं।

राजस्थान के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आम जनता रोजमर्रा के कामों के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काटती है। जब इस तरह की तबादला सूची पर भ्रम बनता है, तो स्थानीय स्तर पर काम पूरी तरह से ठप हो जाता है:

अब कौन सी ट्रांसफर लिस्ट मान्य?
राजस्व विभाग के सख्त आदेश के बाद अब पूरी स्थिति साफ हो चुकी है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची को निरस्त/होल्ड पर रखा गया है।

अब सिर्फ और सिर्फ राजस्व विभाग द्वारा जारी की गई तबादला सूची ही मान्य मानी जाएगी। इसका मतलब है कि 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार वाली सूची के हिसाब से ही अधिकारियों को अपनी नई पोस्टिंग की जगह पर रिपोर्टिंग करनी होगी। विभाग ने सभी जिला कलेक्टर्स और संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दे दिए हैं कि वे केवल विभाग के आदेश का ही पालन करें।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने राजस्थान के राजस्व प्रशासन के भीतर चल रहे आंतरिक संवाद के अभाव को उजागर किया है। आमतौर पर तबादला सूची जारी करने से पहले सभी स्तरों पर स्वीकृति और सत्यापन पूरा किया जाता है। लेकिन एक ही दिन में दो अलगअलग स्रोतों से अलगअलग संख्या में तबादला आदेशों का बाहर आना यह दर्शाता है कि विभागीय प्रक्रियाओं में समन्वय की कमी थी।

सरकार ने हालांकि समय रहते इस पर रोक लगाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन इस घटना से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि नए आदेश के बाद सभी तहसीलों में कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो पाता है या नहीं।

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